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कहानी – प्रोफेशनल – जया आनन्द

आँखे सनी हों या आँखे भरी हों ,दोनो ही उदासियाँ बिखेरती हैं । आज आंखें भरी थी दो नहीं कई आँखें ,आँखों से बरस रही थी उदासियां उन बरसती उदासियों में एक चेहरा उभर रहा था साँवला  सा