मौसम ने परवान चढ़, किया धरा को तुष्ट।।
किया धरा को तुष्ट, फूलती सरसों पीली।
विहग रहे हैं झूम, देख नभ आभा नीली।।
पुष्पों से 'ऋतु' प्रेम,
जताने आए भँवरे।
तनिक ठहर जा दुष्ट, कहाँ जाता है कुहरे।।
मौसम ने परवान चढ़, किया धरा को तुष्ट।।
किया धरा को तुष्ट, फूलती सरसों पीली।
विहग रहे हैं झूम, देख नभ आभा नीली।।
पुष्पों से 'ऋतु' प्रेम,
जताने आए भँवरे।
तनिक ठहर जा दुष्ट, कहाँ जाता है कुहरे।।
त्राहि-त्राहि करती है धरती, पौधे हरे लगाओ
मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ