Dr Ritu Agrawal लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Dr Ritu Agrawal लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

कुंडलियां छंद - डॉ ऋतु अग्रवाल


कुहरे की चादर हटी
, हुआ दिवाकर पुष्ट।

मौसम ने परवान चढ़, किया धरा को तुष्ट।।

किया धरा को तुष्ट, फूलती सरसों पीली।

विहग रहे हैं झूम, देख नभ आभा नीली।।

पुष्पों से 'ऋतु' प्रेम, जताने आए भँवरे।

तनिक ठहर जा दुष्ट, कहाँ जाता है कुहरे।।