जीवन का यह ज्ञान, झोली में भरले अभी।।
निरूप घनाक्षरी छन्द - अनीता सिंह तोमर 'अनी
छवि लगती है न्यारी, रास रचते बिहारी,
मोहित हैं गोपी सारी, कान्हा की दीवानी।
कुंडलियां छंद - डॉ ऋतु अग्रवाल
मौसम ने परवान चढ़, किया धरा को तुष्ट।।
किया धरा को तुष्ट, फूलती सरसों पीली।
विहग रहे हैं झूम, देख नभ आभा नीली।।
पुष्पों से 'ऋतु' प्रेम,
जताने आए भँवरे।
तनिक ठहर जा दुष्ट, कहाँ जाता है कुहरे।।
चौपाई छंद - श्रद्धा पाठक 'स्वस्ति'
ढूँढे आज गोपियाँ सारी।।
कहाँ छुपे हो कान्हा छलिया।
रंग साँवरा ले साँवलिया।।
दोहे - प्रतिभा प्रसाद 'कुमकुम
जंबुद्वीप में आज भी , प्रेम
सुधा अनुबंध ।।
संस्कृति में संस्कार हो , शिक्षा
जग में पूर्ण ।
नई कोंपलें जब खिलें , मधुरसता का चूर्ण ।।
दोहे - डॉ रानी तँवर
बाँधै ऊखल सौं कसे, जसुदा माखन चोर।।
नरम देह कनु की भई, रसरी गरि कै लाल।
अँखियन तें अँसुवा झरैं, गरम हु’इ गवा भाल।।
गीत - निज को कभी नहीं बहकाना - श्रद्धा पाठक ‘स्वस्ति’
(आधार छंद - अरिल्ल छंद, कुल – संस्कारी, 16 मापनी
का सममात्रिक छंद, चरणान्त - 122/11)
निज को कभी नहीं बहकाना
माया देख नहीं भरमाना
गीत - संकेतों में प्रेम - सुविधा पंडित
(दोहा छन्द आधारित गीत)
भास्वर है भ्रू-भंगिमा, भव्य रुचिर रस-रीति
प्रकट करे पल-पल पलक, पुलकित प्रणय-प्रतीति
नवगीत - त्राहि-त्राहि करती है धरती, पौधे हरे लगाओ - डॉ ऋतु अग्रवाल
त्राहि-त्राहि करती है धरती, पौधे हरे लगाओ
मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ
दोहे - रवि यादव ’रवि‘
दो नैनों ने मान ली, दो
नैनों की बात
दो जोड़ी नैना जगें, सारी
सारी रात
कच्ची मिट्टी ले रही, अगर
ग़लत आकार
मिट्टी नहीं कुम्हार है, इसका ज़िम्मेदार
अशोक 'अंजुम' के सर्दी के दोहे
मैं कहता हूँ ‘रपट लिख’, काँपे थानेदार
मौसम की दहलीज पर, खड़ा हुआ है पूस
दोहे - विजेन्द्र शर्मा
इक रिश्ता घुटता रहा , लेकर फेरे साथ !!
भारी पत्थर इश्क़ है , कहते थे ये "मीर" !
चलो उठा के देख लें , आगे जो तक़दीर !!
सवैया छन्द - गोपाल प्रसाद गोप
कविता की निराली है जाति घनी
कवि के अधरान हँसै कविता।
कविता जु उमंग रहै हित सौं
प्रिय के हिय माँहिं बसै कविता।
कविता इक प्रेम कौ आश्रय है, बिरहीन
के नैन खसै कविता।
कविता कहूँ मंचन पै ठुमकै जु अमीरन कैं बिलसै कविता।
घनाक्षरी छन्द - आयुष चराग़
पर्णकुटी में तुम्हें न पाया जिस क्षण सीते!
उस क्षण से तुम्हीं को पाया
कण कण में।
शब्दशः मन बसी छवि को उतार
दिया
वन वासियों को दिये हुए विवरण में।



















