राधेश्यामी छंद - विनीता निर्झर


नदिया का जल शुभ्र रजत सा
,

कल-कल करता बहता जाए।

जीवन में गति रहे निरन्तर,

सबको यह संदेश सुनाए।।

 

सूरज को विश्राम नहीं है,

जग में नित्य लगाता फेरा।

प्राणों का संचार करे जब,

मन को घने तमस ने घेरा।।

 

हर डाली में पुष्प पल्लवित,

मधुरिम गान वृक्ष हैं गाते।

टुकड़े- टुकड़े धूप पिघलती,

कण-कण स्वर्णा’भा फैलाते।।

 

भूली-बिसरी यादें लेकर,

आई है यह हवा छबीली।

सुध-बुध खोकर आज हृदय ने,

प्रेमिल एक कहानी जी ली।।

 

राधे श्यामी छन्द विधान

प्रति पंक्ति -32 मात्राएँ
16 मात्रा पर यति

आरंभ एवं अंत चतुष्कल अथवा षटकल से,

अन्त में मगण (3 दीर्घ / गुरू) छन्द की शोभा बढाते हैं

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