गीत - संकेतों में प्रेम - सुविधा पंडित

 

(दोहा छन्द आधारित गीत)

भास्वर है भ्रू-भंगिमा, भव्य रुचिर रस-रीति

प्रकट करे पल-पल पलक, पुलकित प्रणय-प्रतीति

भ्रू-विलास अनुभाव है ,स्मित संचारी भाव

प्रविकर्षण की प्रेरणा, दृष्टि-बाण का घाव

संकोचों ने साध ली, संकेतों की नीति

प्रकट करे पल-पल पलक, पुलकित प्रणय-प्रतीति

 

पलक-परिधि स्वीकार्य की, धरे परीक्षा मौन

नैन-कोर पर अश्रु की , करे समीक्षा कौन??

नयन निहारे नत नयन, हिय में हलचल-स्फीति

प्रकट करे पल-पल पलक, पुलकित प्रणय-प्रतीति

 

दृष्टि-दृष्टि के द्वन्द्व में, द्रवित हृदय  का धैर्य

मौन-मिलन में ही विलय, आत्माओं का स्थैर्य

अधर-स्पंदना में खिली, चारुल चंचल प्रीति

प्रकट करे पल-पल पलक, पुलकित प्रणय-प्रतीति

 

नैनों के रतनार ये, डोरे बुनें कटाक्ष

स्नेह-दीप का प्रज्वलन, रोशन हृदय-गवाक्ष

पश्न-पंथ से अब हुई, विस्मृत भव की भीति

प्रकट करे पल-पल पलक, पुलकित प्रणय-प्रतीति

 

प्रेम प्रतिष्ठित हो गया, हृदयाँगन के द्वार

कंपित श्वासों ने किया, नैनों से अभिसार

अजब पीरमय हर्ष से, रची प्रेम ने, गीति

प्रकट करे पल-पल पलक, पुलकित प्रणय-प्रतीति

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