जीवन का यह ज्ञान, झोली में भरले अभी।।
सच में ही हूँ दंग, ढंग देख संसार के।।
मीलों उड़ती रेत, पंथ सत्य का है कठिन।
रखना सबसे हेत, यही साथ देगा यहां।।
झीनी जीवन डोर ,कब तक थामोगे इसे।
कोरी रखना कोर, जग काजल की कोठरी।।
श्याम सुनाए राग, वश में सारी गोपियां।
जागे उनके भाग, ब्रज की गलियां धन्य हैं।।

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