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हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
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संस्कृत गीत - भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते - डॉ.प्रीतिः पुजारा
(स्रग्विणी छन्दाधारित संस्कृत गीतिका)
कोमलानां लतानां
वृथा छेदनं
हे प्रभो यद्दिने रोत्स्यते यत्नतः
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प्रेङ्खमाणा यदा
वायुसङ्गेन ताः
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते
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१
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