(आधार छंद - अरिल्ल छंद, कुल – संस्कारी, 16 मापनी
का सममात्रिक छंद, चरणान्त - 122/11)
निज को कभी नहीं बहकाना
माया देख नहीं भरमाना
भाव नहीं केवल शब्दांबर
सहनशीलता मानव भूला
देख स्वयं को हरदम फूला
अपनों से क्यों तू अनजाना
माया देख नहीं भरमाना
दया भाव निरुपाय दिखाना
मानवता का धर्म निभाना
निर्बल का तुम बनो सहारा
होगा तब कल्याण हमारा
सन्मति सब देंगे भगवाना
माया देख नहीं भरमाना
भक्ति शक्ति से वैभव पाना
अहंकार अरु दंभ न लाना
करें साधना ईश्वर अर्पित
जीवन कर तू देव समर्पित
कठिनाई से मत घबराना
माया देख नहीं भरमाना

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