इक रिश्ता बेनाम सा , चला थाम के हाथ !
इक रिश्ता घुटता रहा , लेकर फेरे साथ !!
भारी पत्थर इश्क़ है , कहते थे ये "मीर" !
चलो उठा के देख लें , आगे जो तक़दीर !!
दुनिया है
रफ़्तार की , खरगोशों का दौर !
किस्सों तक ही ठीक है , कछुए वाले तौर !!
कभी ठहरते ही नहीं ,जीवन के दिन -रात !
पर ठहरा वो एक पल , जिसमे तुम थे साथ !!
जलते रहे चराग़ से, महफ़िल में हम रात !
चाँद सितारों की छपी , अख़बारों में बात !!
देना है तो दे ख़ुदा , ऐसा हमे मिज़ाज !
खुद्दारी सर पर रहे , ठोकर में हो ताज !!
भले क़लम दे हाथ में , या दे दे तलवार !
मौला इनकी तू मगर , पैनी रखियो धार !!
तब तो हमको सौंप दी , जब था तेज़ बहाव !
पहुँच किनारे हो गयी , किसी और की नाव !!
ग़म, आँसू, तनहाइयाँ, चारों तरफ अज़ाब !
इन कांटो के बीच भी , तेरी याद गुलाब !!
फिसल न जाऊं फिर कहीं, रहूं हुस्न से दूर
मगर आपकी डीपियां , करती हैं मजबूर
दरिया तेरा दायरा , बढ़ तो गया ज़रूर !
मगर किनारे हो गए , पहले से भी दूर !!
इस्टेशन पर रह गए , हम लहराते हाथ !
कोई ख़ुद को छोड़कर , हमे ले गया साथ !!
इक रिश्ता घुटता रहा , लेकर फेरे साथ !!
भारी पत्थर इश्क़ है , कहते थे ये "मीर" !
चलो उठा के देख लें , आगे जो तक़दीर !!
किस्सों तक ही ठीक है , कछुए वाले तौर !!
पर ठहरा वो एक पल , जिसमे तुम थे साथ !!
जलते रहे चराग़ से, महफ़िल में हम रात !
चाँद सितारों की छपी , अख़बारों में बात !!
देना है तो दे ख़ुदा , ऐसा हमे मिज़ाज !
खुद्दारी सर पर रहे , ठोकर में हो ताज !!
भले क़लम दे हाथ में , या दे दे तलवार !
मौला इनकी तू मगर , पैनी रखियो धार !!
पहुँच किनारे हो गयी , किसी और की नाव !!
ग़म, आँसू, तनहाइयाँ, चारों तरफ अज़ाब !
मगर आपकी डीपियां , करती हैं मजबूर
मगर किनारे हो गए , पहले से भी दूर !!
इस्टेशन पर रह गए , हम लहराते हाथ !
कोई ख़ुद को छोड़कर , हमे ले गया साथ !!

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