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संस्कृत गजल - पक्ष्मणोरालम्बितस्य हार्द्रस्वप्नस्याधुना - डा० लक्ष्मीनारायणपाण्डेयः
संस्कृत (गज्जलिका भावानुवाद सहिता)
पक्ष्मणोरालम्बितस्य
हार्द्रस्वप्नस्याधुना
भावयामि मौक्तिकाभासे मुदा सञ्जीवनम् ।
संस्कृत गजल - वञ्चनारीतेःकृतं केन कदा सम्पादनम् – डॉ लक्ष्मीनारायण पाण्डेय
(संस्कृत गज्जलिका भावानुवाद सहिता)
वञ्चनारीतेःकृतं केन कदा
सम्पादनम्
नीयते हृदयं समोदं दीयते
सन्तापनम्
रीति यह किसने चलाई और कबसे
बोल तो
मुस्कुराते दिल को लेकर भेंट करना पीर को
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