अमृत ध्वनि छंद - योगमाया शर्मा


बंधन अनुपम प्रेम का, गूॅंजे प्रेमिल गीत।

भाव प्रणय मन डूबता, कैसी जग की रीत।।

कैसी जग कीरीत विलग कीअजब बनाई।

मनवा तरसें, अँखियाँ बरसें, प्रीत लगाई।।

बैरी साजनसूना सावन, अंतस क्रंदन।

मेल विरह के, भ्रमर उलझताअनुपम बंधन।।

 


 

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