झूलना छंद - विनीता निर्झर


छवि श्याम की अनुपम लगे, प्रिय राधिका के संग

मुस्कान है जादूभरी, भरती हृदय, निज रंग

धुन बाँसुरी, अनुराग भर, छेड़े नयी मृदु तान

हे! कृष्ण की सुंदर सखी, क्यों है तुम्हें अभिमान

 

गीता पढूँ, श्रीकृष्ण का हर सूत्र में है ज्ञान

मद- मोह का कर त्याग, अब थोड़ा हुआ है भान

जीवन यहाँ, सच, युद्ध है, प्रति पल बना अंगार

बस प्रेम ही सारांश है, निस्सार है, संसार

 

झूलना छन्द विधान

यह एक मात्रिक छन्द है जिसकी प्रत्येक पंक्ति में कुल 26 मात्राएं होती हैं.

7,7,7,5 मात्रा पर यति एवं चरणांत में गुरु लघु अनिवार्य होता है.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी करने के लिए 3 विकल्प हैं.
1. गूगल खाते के साथ - इसके लिए आप को इस विकल्प को चुनने के बाद अपने लॉग इन आय डी पास वर्ड के साथ लॉग इन कर के टिप्पणी करने पर टिप्पणी के साथ आप का नाम और फोटो भी दिखाई पड़ेगा.
2. अनाम (एनोनिमस) - इस विकल्प का चयन करने पर आप की टिप्पणी बिना नाम और फोटो के साथ प्रकाशित हो जायेगी. आप चाहें तो टिप्पणी के अन्त में अपना नाम लिख सकते हैं.
3. नाम / URL - इस विकल्प के चयन करने पर आप से आप का नाम पूछा जायेगा. आप अपना नाम लिख दें (URL अनिवार्य नहीं है) उस के बाद टिप्पणी लिख कर पोस्ट (प्रकाशित) कर दें. आपका लिखा हुआ आपके नाम के साथ दिखाई पड़ेगा.

विविध भारतीय भाषाओं / बोलियों की विभिन्न विधाओं की सेवा के लिए हो रहे इस उपक्रम में आपका सहयोग वांछित है. सादर.