जंबुद्वीप में आज भी , प्रेम
सुधा अनुबंध ।।
संस्कृति में संस्कार हो , शिक्षा
जग में पूर्ण ।
नई कोंपलें जब खिलें , मधुरसता का चूर्ण ।।
सत्य सनातन धर्म में , समरसता वसुधैव ।
शिक्षा यही व सत्य भी , ज्ञानी
कुटुम्बकैव ।।
इच्छा से शिक्षा मिले , सेवा
सेवत धर्म ।
गुरू सान्निध्य से मिला , ज्ञान
धरा में कर्म ।।
सद्गुरु शिक्षा साधना , कर्म
सनातन ज्ञान ।
विद्या मिलती तब हमें , करते हैं
जब ध्यान ।।
गुरु पद सेवा हम करें, भूल मूल
अभिमान ।
बिन माँगे हमको मिले, अक्षर
अक्षर ज्ञान ।।

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