(स्रग्विणी छन्दाधारित संस्कृत गीतिका)
हे प्रभो यद्दिने रोत्स्यते यत्नतः |
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||१||
डीयमाना यदा पक्षिणी द्रक्ष्यते |
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||२||
नूतनं शासनं मूलिता यद्दिने |
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||३||
कामनालोलितं मोदिताऽस्मन्मनः |
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||४||
शिक्षकाः कृष्णवत् विक्लवानर्जुना-
नेलयिष्यन्त्यदा लक्ष्यहीनान् तथा
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||५||
यत्र साधारणा मानवा भारते |
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||६||
रोगदंष्ट्रागतो यन्त्रणा दण्डितः |
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||७||
नः समानो यदा देवमन्त्रस्वरो-
मन्दिरे मस्जिदे गुञ्जिता तद्दिने
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||८||
वन्दिता मानवैः केतने केतने |
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||९||
शासकानां तथा याज्ञिकानां न स्यात् |
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||१०||
मप्रयासेन विक्रीष्यते यद्दिने
पण्यवीथ्यां सखे ! ग्रामके वा पुरे
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||११||
क्लिद्यमानः पुनः शूलति श्रावणे
यद्दिने पुष्पकाले पलाशायते
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||१२||
हृत्तले हृत्तले चेतने वा जडे
यत्र मीरायते कायवीणाऽखिला
भूतले स्वर्गभूमिर्विनिर्मिष्यते ||१३||
चार चरणों का छन्द
प्रत्येक चरण में 3 रगण यानि 12 वर्ण
राजभा चार बार
ला ल ला चार बार
212 चार बार
यहाँ 2 का अभिप्राय दीर्घ यानि गुरू वर्ण से ही है

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