त्राहि-त्राहि करती है धरती, पौधे हरे लगाओ
मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ
सूरज आतप तपन धौंकनी, बढ़ा ताप
का पारा
धूँ- धूँ कर जंगल जलते हैं, करुणा भाव दिखाओ
मानव जीवन मिट जाएगा, पर्यावरण
बचाओ
धूल-धूसरित राहें देखो, जमी हुई
है गारी
कंकरीट के महल खड़े हैं, ऊँचे भवन
अटारी
नई साज-सज्जा के मद में, वृक्ष नहीं कटवाओ
मानव जीवन मिट जाएगा, पर्यावरण
बचाओ
खेत रसायन खाद अटी है, भोजन
दूषित कितना
सब्जी और फलों को रँगता, गिरा
गर्त मनु इतना
मौन तोड़ कर, आगे बढ़कर, मुखर गुहार लगाओ
मानव जीवन मिट जाएगा,पर्यावरण बचाओ
सार छन्द विधान
यह एक मात्रिक छन्द है. प्रत्येक पंक्ति में कुल
28 मात्राएँ होती हैं. 16 और 12 मात्राओं पर यति का विधान है. प्रत्येक दो
पंक्तियों में तुक होना अनिवार्य है. अन्त में लघु लघु लघु लघु या लघु लघु गुरू या
गुरू गुरू या गुरू लघु लघु लेना ही श्रेयस्कर है. लय में बाधा उत्पन्न होते ही यह
छन्द अप्रासंगिक हो जाता है. कुछ विद्वान इसे “छन्न पकैया’ एवं “ललित छन्द ” नाम से भी जानते हैं.

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