अगली पीढ़ी है संकट में, रहते हैं
भयभीत।
आशाओं के दीप जलाकर, लिख देंगे हम जीत।।
नित इतिहास डराता हमको, दया बनी
अभिशाप।
कठिन यातना भोगी जिसने, करता
दुष्ट प्रलाप।
उथल- पुथल रहती है अंदर, कैसी हो
रण नीत।
आशाओं के दीप जलाकर, लिख देंगे हम जीत।।
भ्रम की चादर ऐसी फैली, छुपता
गया प्रकाश।
झूठ सत्य बन आन खड़ा था, करता रहा
विनाश।।
उदित हुआ है आज दिवाकर, समय न
जाए बीत।
आशाओं के दीप जलाकर, लिख देंगे हम जीत।।
कठिन चुनौती आई हम पर, करना है
संघर्ष।
सत्य सनातन जाग उठा है, मन में
यह उत्कर्ष।।
कम होती अपनी आबादी, बदलो तुम यह रीत।
आशाओं के दीप जलाकर, लिख देंगे हम जीत।।

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