जब हूक उठे व्याकुल दिल में, और धड़कन
रुकती सी लागे,
तुम उसी जगह आना मिलने,जिस जगह से बिछड़े थे हम तुम...
इक याद ठुमकती आ जाए, पर आंखों
को रोने ना दे।
बैचेन सिसकती साँसों पर,नग़मा छेड़े
जब बिखरे पल,
हम राह तकेंगे हाथ लिए टूटे वादे बैठे गुमसुम...
तुम उसी जगह आना मिलने जिस जगह से बिछड़े थे हम तुम
जब चाँद खिले चंचल नदिया, लहरों पर
कोई गीत लिखे,
(जब) जुगनू पेड़ों की शाख़ों पर, यौवन की
अल्हड़ प्रीत लिखे।
बादल बिजुरी के अंक लगे,तारों के
घर में उत्सव हो,
और प्रेम हृदय के आंगन में इठलाये नाचे छुम छुम
छुम....
तुम उसी जगह आना मिलने जिस जगह से बिछड़े थे हम
तुम।
तुम पाओगे इक पागल मन, इक तारा
ले गाती जोगन,
बरसों बीते पथ पर बैठी, अब तक
सुधियों की बंजारन।
तब दौड़ गले मिलना उससे,कहना आया
मैं लौट प्रिये,
मिल जाएगी पागल प्रीत वहीं, शीश सजा
रक्तिम कुमकुम,
तुम उसी जगह आना मिलने जिस जगह से बिछड़े थे हम
तुम...

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