गीत - जब हूक उठे व्याकुल दिल में, और धड़कन रुकती सी लागे - दीपशिखा सागर


जब हूक उठे व्याकुल दिल में, और धड़कन रुकती सी लागे,

तुम उसी जगह आना मिलने,जिस जगह से बिछड़े थे हम तुम...

 तन्हाई जब भी रातों को, पागल कर दे सोने ना दे,

इक याद ठुमकती आ जाए, पर आंखों को रोने ना दे।

बैचेन सिसकती साँसों पर,नग़मा छेड़े जब बिखरे पल,

हम राह तकेंगे हाथ लिए टूटे वादे बैठे गुमसुम...

तुम उसी जगह आना मिलने जिस जगह से बिछड़े थे हम तुम

 

जब चाँद खिले चंचल नदिया, लहरों पर कोई गीत लिखे,

(जब) जुगनू पेड़ों की शाख़ों पर, यौवन की अल्हड़ प्रीत लिखे।

बादल बिजुरी के अंक लगे,तारों के घर में उत्सव हो,

और प्रेम हृदय के आंगन में इठलाये नाचे छुम छुम छुम....

तुम उसी जगह आना मिलने जिस जगह से बिछड़े थे हम तुम।

 

तुम पाओगे इक पागल मन, इक तारा ले गाती जोगन,

बरसों बीते पथ पर बैठी, अब तक सुधियों की बंजारन।

तब दौड़ गले मिलना उससे,कहना आया मैं लौट प्रिये,

मिल जाएगी पागल प्रीत वहीं, शीश सजा रक्तिम कुमकुम,

तुम उसी जगह आना मिलने जिस जगह से बिछड़े थे हम तुम...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी करने के लिए 3 विकल्प हैं.
1. गूगल खाते के साथ - इसके लिए आप को इस विकल्प को चुनने के बाद अपने लॉग इन आय डी पास वर्ड के साथ लॉग इन कर के टिप्पणी करने पर टिप्पणी के साथ आप का नाम और फोटो भी दिखाई पड़ेगा.
2. अनाम (एनोनिमस) - इस विकल्प का चयन करने पर आप की टिप्पणी बिना नाम और फोटो के साथ प्रकाशित हो जायेगी. आप चाहें तो टिप्पणी के अन्त में अपना नाम लिख सकते हैं.
3. नाम / URL - इस विकल्प के चयन करने पर आप से आप का नाम पूछा जायेगा. आप अपना नाम लिख दें (URL अनिवार्य नहीं है) उस के बाद टिप्पणी लिख कर पोस्ट (प्रकाशित) कर दें. आपका लिखा हुआ आपके नाम के साथ दिखाई पड़ेगा.

विविध भारतीय भाषाओं / बोलियों की विभिन्न विधाओं की सेवा के लिए हो रहे इस उपक्रम में आपका सहयोग वांछित है. सादर.