संस्कृत गीत - सघन-घन-घटायते नभः - डॉ कमला पाण्डेय


सखि !श्यामला वसुन्धरा रसायते सघन-घन-घटायते नभः ।

सखि!तडिदसिरिव चपलायते सघन-घन-घटायते नभः।। १।।

 

चं चं चं चम्यते चञ्चला भङ्गसहस्रायते ह्यूर्मिला

सखि!अशनिः तड्तड्-तड्तडायते सघन-घन-घटायते नभः।।२।।

सखि!श्यामला…

 

तमसाऽऽवृतो गुरो! नो लोकः, क्रियतां शुचिकिरणैरालोकः। 

सखि! अमा सपदि पूर्णिमायते सघन-घन-घटायते नभः।।३।।

सखि!श्यामला…

 

चरणशरणमुपयामि कृपामय! अनुकम्पय करुणावरुणालय!

सखि!गुरोरुपदेशः  सुखायते सघन-घन-घटायते नभः ।।४।।

सखि!श्यामला…

 

नमो नमो गुरुदेव! दयामय! हर परितापं रुचिरबोधमय !

सखि!महोपकृतिर्  यशायते सघन-घन-घटायते नभः।।५।।

सखि!श्यामला…

 

वयं कुर्महे कोटि प्रणामं ,देव!प्रसीद नतानां कामं ।

सखि!गुरुवर-वरोऽमृतायते सघन-घन-घटायते नभः।।६।।

सखि!श्यामला…

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