सखि!तडिदसिरिव चपलायते सघन-घन-घटायते नभः।। १।।
चं चं चं चम्यते चञ्चला भङ्गसहस्रायते ह्यूर्मिला
सखि!अशनिः तड्तड्-तड्तडायते सघन-घन-घटायते नभः।।२।।
सखि!श्यामला…
तमसाऽऽवृतो गुरो! नो लोकः, क्रियतां शुचिकिरणैरालोकः।
सखि! अमा सपदि पूर्णिमायते सघन-घन-घटायते नभः।।३।।
सखि!श्यामला…
चरणशरणमुपयामि कृपामय! अनुकम्पय करुणावरुणालय!
सखि!गुरोरुपदेशः
सुखायते सघन-घन-घटायते नभः ।।४।।
सखि!श्यामला…
नमो नमो गुरुदेव! दयामय! हर परितापं रुचिरबोधमय !
सखि!महोपकृतिर्
यशायते सघन-घन-घटायते नभः।।५।।
सखि!श्यामला…
वयं कुर्महे कोटि प्रणामं ,देव!प्रसीद नतानां कामं ।
सखि!गुरुवर-वरोऽमृतायते सघन-घन-घटायते नभः।।६।।
सखि!श्यामला…

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