हर बूँद में पीड़ा झरे, इतना
विरह मत दीजिए
जीवन अधूरी प्यास है, बस प्यार देकर सींचिए
सीता नहीं गीता नहीं, बस प्रीत का आभास हूँ
प्रिय हो चुकी तुलना बहुत, पहचान अब तो लीजिए
हर बूँद में पीड़ा झरे, इतना
विरह मत दीजिए
उन्मुक्त मैं खिलती कली, हर पल
सुवासित ही रही
खुशियाँ बिखेरीं राह में, हर वेदना
थी अनकही
मत तोड़ना दिल को कभी, मुझ पर
भरोसा कीजिए
हर बूँद में पीड़ा झरे, इतना
विरह मत दीजिए
दुनिया तमाशा देखती, इस बात का संज्ञान हो
जो दिल कहे करना सदा, मुख में
मृदुल मुस्कान हो
मधुमास इच्छित है अगर, प्रांजल
सुधा रस पीजिए
हर बूँद में पीड़ा झरे, इतना
विरह मत दीजिए

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