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ગઝલ - બધું નિઃશબ્દ હો ત્યારે આ ટેલિફોન રણકે છે - ધાર્મિક પરમાર

 

બધું નિઃશબ્દ હો ત્યારે આ ટેલિફોન રણકે છે!
થઈ શત્રુ રવિવારે આ ટેલિફોન રણકે છે!
 
સુકાયેલી બધી ડાળો ઉપર ખીલે ટપોટપ ફૂલ,
અહીં વૃદ્ધાશ્રમે જ્યારે આ ટેલિફોન રણકે છે!

ગઝલ - અમને તોડી નજીકથી નીકળ્યું - જયુ સોલંકી

 

અમને તોડી નજીકથી નીકળ્યું
કોઈ રોઈ
, નજીકથી નીકળ્યું
 
કોઈ નીકળ્યું નજીકથી તો થ્યું
'જાણી જોઈ નજીકથી નીકળ્યું'

ब्रजगजल - चार पैसा पाय कें बिन बात के बुकलात है - पूनम शर्मा पूर्णिमा

 

चार पैसा पाय कें बिन बात के बुकलात है

च्यों करै गिल्ला-गुजर, जम आइ कें लै जात है

 

जे भलौ आयौ जमानों, नैन नीचै है रहे

प्हैर कें फाटे घुटन्ना, ना कोई सकुचात है

हिन्दीगजल - प्रेम की भावना रखो मन में – डॉ आरती कुमारी


 प्रेम की भावना रखो मन में

फूल खिलते हैं जैसे उपवन में

 

राम जैसे न बन सको लेकिन

तुम लगाओ न ध्यान रावन में

ગુજરાતી ગઝલ - શબદ નામે સાથી, શબદ છે સહારો - શબનમ ખોજા


શબદ નામે સાથી
, શબદ છે સહારો

લખ્યો એની નિશ્રામાં મારો ગુજારો.

 

મને મારી ભીતર મળ્યો એકતારો

કોઈ આવી, મારી નજર તો ઉતારો!

ગુજરાતી ગઝલ - ધૈર્ય મારું જોઈ શરમાઈ જશે - અંજના ભાવસાર ‘અંજુ’


ધૈર્ય
મારું જોઈ શરમાઈ જશે;

તારી 'ના' 'ના'.. 'હા'માં બદલાઈ જશે!

 

તારી પાંપણ ઢાળીને તું રાખજે,

જૂઠ તારું નહિ તો પકડાઈ જશે.

मराठी गझल - प्रवाहाचे नियम विसरायचे आता – निर्मिती कोलते


 प्रवाहाचे नियम विसरायचे आता

दिवे पाण्यामधे सोडायचे आता

 

उशाला स्वप्न जर झोपून गेले तर

कशाला रात्रभर जागायचे आता

भोजपुरी गजल - नैन में, नेह के कमी बाटे – वीणा सिन्हा


 नैन में, नेह के कमी बाटे ।
अइसने, अब त आदमी बाटे ।

आपने लोग अब दगा देता,
एहि से आँख में नमी बाटे ।

ग़ज़ल - मैं दर्दो अज़ीयत की तलबगार नहीं हूँ - सपना एहसास


  मैं दर्दो अज़ीयत की तलबगार नहीं हूँ

सो जिन्स-ए-महब्बत की ख़रीदार नहीं हूँ

 

ख़ुद अपने ही हाथों से किया तर्के-त’अल्लुक़

अब छोड़ दिया उसको तो नादार नहीं हूँ 

ब्रजगजल - प्रेम कौ अनुपात आखिर कैसैं आँकौ जायगौ – उर्मिला माधव

 

 
प्रेम कौ अनुपात आखिर कैसैं आँकौ जायगौ
यों बताऔ, मन के भीतर कैसैं झाँकौ जायगौ
 
पीर कौ अनुमान अब तक कौन कर पायौ कहौ
एक ही लठिया ते कैसे प्रेम हाँकौ जायगौ

हिन्दी गजल - भीड़ दुखों की पल-पल भारी रहती है – डॉ. दमयन्ती शर्मा ‘दीपा’

 


 भीड़ दुखों की पल-पल भारी रहती है
जीवन है सो मारा-मारी रहती है
 
बोल पिता के काँटे जैसे हैं तो क्या
मन में तो सुरभित फुलवारी रहती है

हिन्दी गजल - न पौरुष और न ही पुरुषार्थ समझा – पूनम विश्वकर्मा

 

न पौरुष और न ही पुरुषार्थ समझा
परम् समझा न तू परमार्थ समझा
 
तुझे तो ज्ञान का अपने अहम है
कहाँ तू ज्ञान का भावार्थ समझा

ગુજરાતી ગઝલ - કલમનો સાથ લઈ મથવાનું બાકી છે - અંકિતા મારુ 'જીનલ


કલમનો સાથ લઈ મથવાનું બાકી છે,

હજી તો કેટલું લખવાનું બાકી છે!

मराठी गझल - जरा जरा माझ्या डोक्याला ताप पाहिजे - पूजा भडांगे

 

जरा जरा माझ्या डोक्याला ताप पाहिजे
असो कसाही जगावयाला बाप पाहिजे
 
पिदाड, भोळा, मारकुटा पण मायाळूही
बाबा बाबा म्हणावयाला बाप पाहिजे

भोजपुरी गजल - एक दिन एक साल गुजरत बा - वीणा सिन्हा


एक दिन एक साल गुजरत बा

का पता बात ई उ समझत बा  

 

छोड़ के चल गइल कहाँ जाने

अब करेजा में टीस टुभकत बा

ग़ज़ल - वादियों से ख़ामुशी के ज़ख़्म वो धोने लगा - मुमताज़ अज़ीज़ नाज़ाँ

 

वादियों से ख़ामुशी के ज़ख़्म वो धोने लगा
चुप हुए जब हम तो मौसम फूट कर रोने लगा

फिर हुई ज़ख़्मी परों को आरज़ू परवाज़ की
हौसला फिर से जुनूँ की हसरतें ढोने लगा

ग़ज़ल - इन निगाहों पे मुहब्बत में है इल्ज़ाम बहुत - अर्चना वर्मा सिंह

 

इन निगाहों पे मुहब्बत में हैं इल्ज़ाम बहुत
बेसबब दिल को ये देती रहीं पैग़ाम बहुत
 
दिल-ए-नादाँ जो कभी करता नहीं उल्फ़त तो
ज़िन्दगी में नहीं होते कभी कोहराम बहुत

ग़ज़ल - कहें क्या हुआ हमको क्या रफ़्ता-रफ़्ता – डॉ. अनिषा अंगरा ‘अंगिरा’

 

कहें क्या हुआ हमको क्या रफ़्ता-रफ़्ता

हुए इश्क़ में मुब्तिला रफ़्ता-रफ़्ता

 

नज़र उनकी उतरी यूं दिल में हमारे

ख़ला दिल का भरता गया रफ़्ता-रफ़्ता

ग़ज़ल - उसने तुमको क्या कुछ दे के नवाज़ा है – मधु ‘मधुमन’

 

उसने तुमको क्या कुछ दे के नवाज़ा है

क्या तुमको इस बात का कुछ अंदाज़ा है

 

हासिल है हर चीज़ न जाने क्यूँ फिर भी

सबके लबों पर कोई न कोई तक़ाज़ा है