हिन्दीगजल - प्रेम की भावना रखो मन में – डॉ आरती कुमारी
फूल खिलते हैं जैसे उपवन में
राम जैसे न बन सको लेकिन
तुम लगाओ न ध्यान रावन में
ગુજરાતી ગઝલ - શબદ નામે સાથી, શબદ છે સહારો - શબનમ ખોજા
લખ્યો એની નિશ્રામાં મારો ગુજારો.
મને મારી ભીતર મળ્યો એકતારો
કોઈ આવી, મારી નજર તો ઉતારો!
ગુજરાતી ગઝલ - ધૈર્ય મારું જોઈ શરમાઈ જશે - અંજના ભાવસાર ‘અંજુ’
તારી 'ના' 'ના'.. 'હા'માં બદલાઈ જશે!
તારી પાંપણ ઢાળીને તું રાખજે,
જૂઠ તારું નહિ તો પકડાઈ જશે.
मराठी गझल - प्रवाहाचे नियम विसरायचे आता – निर्मिती कोलते
दिवे पाण्यामधे सोडायचे आता
उशाला स्वप्न जर झोपून गेले
तर
कशाला रात्रभर जागायचे आता
ग़ज़ल - मैं दर्दो अज़ीयत की तलबगार नहीं हूँ - सपना एहसास
सो जिन्स-ए-महब्बत की ख़रीदार
नहीं हूँ
ख़ुद अपने ही हाथों से किया
तर्के-त’अल्लुक़
अब छोड़ दिया उसको तो नादार नहीं हूँ
ब्रजगजल - प्रेम कौ अनुपात आखिर कैसैं आँकौ जायगौ – उर्मिला माधव
यों बताऔ, मन के भीतर कैसैं झाँकौ जायगौ
एक ही लठिया ते कैसे प्रेम हाँकौ जायगौ
हिन्दी गजल - भीड़ दुखों की पल-पल भारी रहती है – डॉ. दमयन्ती शर्मा ‘दीपा’
जीवन है सो मारा-मारी रहती है
मन में तो सुरभित फुलवारी रहती है
हिन्दी गजल - न पौरुष और न ही पुरुषार्थ समझा – पूनम विश्वकर्मा
परम् समझा न तू परमार्थ समझा
कहाँ तू ज्ञान का भावार्थ समझा
मराठी गझल - जरा जरा माझ्या डोक्याला ताप पाहिजे - पूजा भडांगे
पिदाड, भोळा, मारकुटा पण मायाळूही
ग़ज़ल - वादियों से ख़ामुशी के ज़ख़्म वो धोने लगा - मुमताज़ अज़ीज़ नाज़ाँ
चुप हुए जब हम तो मौसम फूट कर रोने लगा
फिर हुई ज़ख़्मी परों को आरज़ू परवाज़ की
हौसला फिर से जुनूँ की हसरतें ढोने लगा
ग़ज़ल - इन निगाहों पे मुहब्बत में है इल्ज़ाम बहुत - अर्चना वर्मा सिंह
इन निगाहों पे मुहब्बत में हैं इल्ज़ाम बहुत
बेसबब दिल को ये देती रहीं पैग़ाम बहुत
दिल-ए-नादाँ जो कभी करता नहीं उल्फ़त तो
ज़िन्दगी में नहीं होते कभी कोहराम बहुत
ग़ज़ल - कहें क्या हुआ हमको क्या रफ़्ता-रफ़्ता – डॉ. अनिषा अंगरा ‘अंगिरा’
कहें क्या हुआ हमको क्या रफ़्ता-रफ़्ता
हुए इश्क़ में मुब्तिला रफ़्ता-रफ़्ता
नज़र उनकी उतरी यूं दिल में हमारे
ख़ला दिल का भरता गया रफ़्ता-रफ़्ता
ग़ज़ल - उसने तुमको क्या कुछ दे के नवाज़ा है – मधु ‘मधुमन’
उसने तुमको क्या कुछ दे के
नवाज़ा है
क्या तुमको इस बात का कुछ
अंदाज़ा है
हासिल है हर चीज़ न जाने
क्यूँ फिर भी
सबके लबों पर कोई न कोई तक़ाज़ा है



















