हिन्दीगजल - प्रेम की भावना रखो मन में – डॉ आरती कुमारी
प्रेम की भावना रखो मन में
फूल खिलते हैं जैसे उपवन में
राम जैसे न बन सको लेकिन
तुम लगाओ न ध्यान रावन में
पल में मिट जाएगा ये सूनापन
डाल दो, चार दाने आँगन
में
तुम भी रम जाओ इस तरह मुझमें
जैसे मीरा रमी है मोहन में
सच है जप तप तो मन से होता है
बावरे क्या लगा है आसन में
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