वादियों से ख़ामुशी के
ज़ख़्म वो धोने लगा
चुप हुए जब हम तो मौसम फूट कर रोने लगा
चुप हुए जब हम तो मौसम फूट कर रोने लगा
आँख की खिड़की से फिर
क्यूँ झाँकती हैं हसरतें
दिल में ये कैसा तलातुम फिर बपा होने लगा
दिल में ये कैसा तलातुम फिर बपा होने लगा
ढूँढने निकले थे हम तो अपना गुमगश्ता वजूद
अब तो आईने में अपना अक्स भी खोने लगा
अब तो आईने में अपना अक्स भी खोने लगा
दिल के सेहरा में न जाने कैसा ये तूफ़ान है
रेत पर शबनम की फ़सलें कौन ये बोने लगा
रेत पर शबनम की फ़सलें कौन ये बोने लगा
अजनबी से हम नज़र आए ख़ुद अपने आप को
आज जब ख़ुद से हमारा सामना होने लगा
आज जब ख़ुद से हमारा सामना होने लगा
बेहिसी "मुमताज़" फिर से रूह पर हाकिम हुई
हो गया ख़ामोश हर तूफ़ाँ, जुनूँ सोने लगा
हो गया ख़ामोश हर तूफ़ाँ, जुनूँ सोने लगा
आरज़ू – इच्छा, परवाज़ – उड़ान, जुनूँ – सनक, हसरतें – इच्छाएँ, तलातुम –
लहरों की हलचल, बपा – बरपा, गुमगश्ता – खोया हुआ, अक्स – प्रतिबिंब,
सेहरा – रेगिस्तान, शबनम – ओस, बेहिसी – भावना शून्यता, रूह – आत्मा,
हाकिम – शासक
लहरों की हलचल, बपा – बरपा, गुमगश्ता – खोया हुआ, अक्स – प्रतिबिंब,
सेहरा – रेगिस्तान, शबनम – ओस, बेहिसी – भावना शून्यता, रूह – आत्मा,
हाकिम – शासक

हृदयस्पर्शी।
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