ब्रजगजल - प्रेम कौ अनुपात आखिर कैसैं आँकौ जायगौ – उर्मिला माधव

 

 
प्रेम कौ अनुपात आखिर कैसैं आँकौ जायगौ
यों बताऔ, मन के भीतर कैसैं झाँकौ जायगौ
 
पीर कौ अनुमान अब तक कौन कर पायौ कहौ
एक ही लठिया ते कैसे प्रेम हाँकौ जायगौ
 
आँख के आँसुन ऐ तौ तुम हाथ ते ढकि लेउगे
घाव की दुनिया कौ हिस्सा कैसैं ढाँकौ जायगौ
 
जिंदगी भर राख चूल्हे की लगी रइ हाथ में
जे बताऔ और कब तक रेत फाँकौ जायगौ
 
झालरी, झूमर सजा कें, देह सुन्दर कर ल
कौन खन जे भाग मोतिन संग टाँकौ जायगौ

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