हिन्दी गजल - न पौरुष और न ही पुरुषार्थ समझा – पूनम विश्वकर्मा

 

न पौरुष और न ही पुरुषार्थ समझा
परम् समझा न तू परमार्थ समझा
 
तुझे तो ज्ञान का अपने अहम है
कहाँ तू ज्ञान का भावार्थ समझा

न समझा तन का अपने कार्य तूने
न अपनी आत्मा का स्वार्थ समझा
 
किया शब्दों का जब उपयोग इतना
बता क्या सच में तू शब्दार्थ समझा
 
वो क्या कर पाएगा शास्त्रीय चर्चा
जो उलझाता है क्या शास्त्रार्थ समझा
 
पहन कर धर्म निकले हैं अधर्मी
अधम कोई कहाँ धर्मार्थ समझा

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