भोजपुरी गजल - एक दिन एक साल गुजरत बा - वीणा सिन्हा


एक दिन एक साल गुजरत बा

का पता बात ई उ समझत बा  

 

छोड़ के चल गइल कहाँ जाने

अब करेजा में टीस टुभकत बा

 ई चनरमा से जा के पूछब हम

अब उ कवना गली से निकसत बा

 

आँख के लोर कोर पर सूखल

चाह के भी ना अब इ टपकत बा

 

केकरा से कहीं इ सब आफत

अब त गफलत में जान निकलत बा

3 टिप्‍पणियां:

  1. वाह, बहुत सुन्दर आत्मीय वीणा सिंहा जी । अपनी भाषा और बोली के प्रति आपका प्रेम प्रणम्य है ।

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  2. Bahot hi sundar 👏👏🫡🫡🫶👌👌

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  3. Bahot Sundar gazal hai 👏👏 waah mausi ji ♥️🙏🥰

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