च्यों करै गिल्ला-गुजर, जम आइ कें लै जात है
जे भलौ आयौ जमानों, नैन नीचै है रहे
प्हैर कें फाटे घुटन्ना, ना कोई सकुचात है
या जनम की सिग कमाई, नीर जैसी रिस गई
दाँव सिगरे आजमाये, हाथ कछु ना आत है
भौत लैवे की गरज में, इत-उतै भाजे फिरे
“चार दिन की चाँदनी है फिर
अँधेरी रात है”
पिछलगू तौ पिछलगू हैं, बात मौके पै कहौ
डेगची के नाम पै चमचा मलाई
खात है
मेंड़ हरहारौ सजावै, खेत खरपतवार हैं
बे-छने कौ खा रह्यौ है, बे-करे कौ पात है
काँख में पैनी छुरी अरु मुख
सों बोलें राम हैं
एक चिकनी-चूपड़ी रंग देख कें
सरकात है
अहम् कौ टूटौ भरम , पन्ना जरौ इतिहास कौ
इकलगाँ कूँ सेर, दूजे लोमड़ा घिघियात है
जीति कें हू हार कौ सेला
सुहायौ अनमनों
एक पट्ठा हार कें हू ,सौ गुनों मुसक्यात है
लोप चिट्ठि’न कौ भयौ है, लेखनी लाचार है
अपनी परिपाटी कूँ 'पूनम' संगणक ना भात है

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी करने के लिए 3 विकल्प हैं.
1. गूगल खाते के साथ - इसके लिए आप को इस विकल्प को चुनने के बाद अपने लॉग इन आय डी पास वर्ड के साथ लॉग इन कर के टिप्पणी करने पर टिप्पणी के साथ आप का नाम और फोटो भी दिखाई पड़ेगा.
2. अनाम (एनोनिमस) - इस विकल्प का चयन करने पर आप की टिप्पणी बिना नाम और फोटो के साथ प्रकाशित हो जायेगी. आप चाहें तो टिप्पणी के अन्त में अपना नाम लिख सकते हैं.
3. नाम / URL - इस विकल्प के चयन करने पर आप से आप का नाम पूछा जायेगा. आप अपना नाम लिख दें (URL अनिवार्य नहीं है) उस के बाद टिप्पणी लिख कर पोस्ट (प्रकाशित) कर दें. आपका लिखा हुआ आपके नाम के साथ दिखाई पड़ेगा.
विविध भारतीय भाषाओं / बोलियों की विभिन्न विधाओं की सेवा के लिए हो रहे इस उपक्रम में आपका सहयोग वांछित है. सादर.