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निज लक्ष्य जब तक सिद्ध ना हों, बेधड़क बढ़ते रहें

सभी साहित्य रसिकों का सादर अभिवादन


हरिगीतिका छंद आधारित आयोजन के अगले चक्र में आज हम पढ़ते हैं आ. बृजेश त्रिपाठी जी को। बृजेश जी मंच से पहले से जुड़े हुए हैं और हम पिछले आयोजनों में इन की कुण्डलिया और घनाक्षरियाँ पढ़ भी चुके हैं।

चौथी समस्या पूर्ति - घनाक्षरी - बन्नो के हैं आभूषण-परिधान भ्रष्टाचार

सभी साहित्य रसिकों का सादर अभिवादन

दो नौजवान कवियों के छन्द पढ़ने के बाद, इस आयोजन के नौवें चक्र में आज हम पढ़ेंगे आदरणीय श्री बृजेश त्रिपाठी जी के छंदों को| इस पोस्ट के साथ इस आयोजन के कवियों की संख्या हो गई ११ और घनाक्षरी छंदों की संख्या हो गई ३०|

आदरणीय श्री बृजेश त्रिपाठी जी को इस मंच पर हम पहले भी पढ़ चुके हैं| जैसा कि हमने पिछली पोस्ट में कहा था कि कवि की कल्पना अथाह सागर की भांति होती है, उसी को चरितार्थ करते हैं आप के छन्द| अनुभवी निगाहें, बात में से कैसे बात निकाल लेती हैं, इस का अच्छा उदाहरण दे रहे हैं आप| हालाँकि रस परिवर्तन जैसी कुछ रियायतें ली हैं आपने, परन्तु उम्र को दरकिनार करती छन्द साहित्य की सेवा और विषय की विशिष्टता उसे ढँक देती है| आइये पढ़ते हैं - भ्रष्टाचार पर निशाना साधते इन के छंदों को:-




साधु-संतो-योगियों पे, कीजिये न अत्याचार,
संतों से ले कर सीख, भ्रष्टता मिटाइए|

सोती हुई जनता पे, लाठियाँ चलाते हुए,
थोडा थमिएगा, थोडा - सा तो शरमाइए|

काले धन की वापसी - पे हैरानी होती है क्यों,
काले धन को वापस, देश में ही लाईये|

खुद ही जो दोषी हों तो, करें प्रायश्चित आप,
राजनीति का अखाडा, घर न बनाईये||

[सम सामयिक विषय पर दो टूक बात कही है आपने| काले धन की वापसी
होनी ही चाहिए| और 'खुद ही दोषी हों' वाली बात तो क्या कहने|
नीतिगत विषय पर उम्दा प्रस्तुति]


ऊबड़-खाबड़ चाँद - से न तुलना करो जी
जानिए कि उसने क्यों - खुद को छिपाया है|

कहाँ सदरीति, कहाँ - रूखा-सूखा निशापति,
तुलना की कल्पना से, व्योम घबड़ाया है|

लाठी - गोली - आँसू-गैस, सारे हथकंडे फेल,
ब्यूटी-कम्पटीशन में, वो हड़बड़ाया है|

जग की अनीति पे तू, भारी सदा सदरीति
देख तेरी सुन्दरता, चाँद भी लजाया है||

[ओहो, इस पंक्ति को ले कर इस तरह की प्रस्तुति!!! है न अनुभव वाली बात!!!!
वाकई सदरीति की भला क्या तुलना रूखे सूखे निशापति से| रस-विषय
परिवर्तन जो थोड़ा सा है भी, विशिष्टता को ले कर आया है|
'ब्यूटी कम्पटीशन' का बहुत ही मनोहारी प्रयोग किया है
आपने, बधाई के पूरे पूरे हकदार हैं आप]


बन्नो सरकारी वेश-भूषा में सुन्दर लगे,
बन्ने का तो भेष ही, रोचक समाचार है|

बन्नो के हैं आभूषण-परिधान भ्रष्टाचार,
बन्ने का तो भगवा दुपट्टा कंठहार है|

बन्नो शरमीली, मुँह - ढाँपे फिरे दशकों से,
बन्ने का तो ऊँचा स्वर एक इश्तहार है|

बन्नो खिसियाई बिल्ली, खम्भा नोचने में लगी,
बन्ने का बदन जैसे क़ुतुब मीनार है||

[ हास्य रस पर केन्द्रित इस पंक्ति पर आपने गज़ब की
व्यंग्यातमक प्रस्तुति दी है| कवि की कल्पना है भाई]


जहाँ चाह, वहाँ राह| कवि ठाने, तो कल्पनाएं खुद-ब-खुद चल कर आती हैं उस के पास| रूपक और उपमाएँ हाजिर रहती हैं उस के दरबार में| विषय - कल्पना - व्याकरण - रस - छन्द -अलंकार वगैरह का संसार बहुत बड़ा है| आलोचक और समीक्षक अभी भी उस पर काम कर रहे हैं, निष्कर्ष प्रतीक्षारत है :)| परिवर्तन संसार का अकाट्य नियम है|

छंदों को सिर्फ एक फॉर्मेट / उपकरण मानते हुए, यदि उन पर समय के अनुसार हम लोग अच्छे, तार्किक और जन-साधारण को रुचिकर प्रयोग करते रहेंगे, तो इन छंदों को अगली पीढ़ियों तक 'सहज-स्वीकृत' रूप में पहुँचा पाएंगे, अन्यथा सत्य हम सब जानते ही हैं|

आदरणीय त्रिपाठी जी के इन अनमोल छंदों का रस पान करने के साथ साथ इन पर अपनी टिप्पणी रूपी पुष्प वर्षा आप को करनी है और हमें तैयारी करनी है एक और हिलाऊ टाइप पोस्ट की|

कुछ और मित्रों ने भी छन्द भेजे हैं, उन की लगन और दृढ़ इच्छा शक्ति को प्रणाम| व्यस्तता वश उत्तर पेंडिंग हैं, पर जल्द ही ये काम भी शुरू किया जायेगा| तब तक उन सभी मित्रों से निवेदन है कि इस आयोजन की घनाक्षरी छन्द संबन्धित अब तक की सभी पोस्ट पढ़ें, घोषणा वाली पोस्ट को बार बार पढ़ें, दी गईं औडियो लिंक्स को बार बार सुनें, इस से हमारा और उन का - दोनों का काम काफी आसान हो जाएगा| उन की आसानी के लिए सारी की सारी लिंक्स एक बार फिर से यहीं इसी पोस्ट में नीचे दी गई हैं|


इस आयोजन को आप लोगों द्वारा प्रदत्त सहयोग के लिए बहुत बहुत आभार| मित्रो, कभी कभी ठाले-बैठे भी देख लिया करो, भाई कवि हैं हम भी तो, आप की राय की प्रतीक्षा हमें भी रहती है|


जय माँ शारदे!

तीसरी समस्या पूर्ति - कुण्डलिया - छठी किश्त - सुंदरियाँ इठला रहीं रन-वर्षा के साथ

सभी साहित्य रसिकों का सादर अभिवादन

समस्या पूर्ति मंच द्वारा कुण्डलिया छन्द पर आयोजित इस आयोजन में अब तक हम सरस्वती पुत्रों के २५ कुण्डलिया छन्द पढ़ चुके हैं| अब पढ़ते हैं दो और सरस्वती पुत्रों को| भाई दिलबाग विर्क जी पहली बार इस आयोजन में शामिल हुए हैं और छन्द साहित्य में उन का रुझान देखते हुए आशा बँधती है कि और भी कई कवियों से आने वाले समय में और भी सुन्दर सुन्दर छन्द पढ़ने को मिलेंगे| आदरणीय बृजेश त्रिपाठी जी ने भी अस्वस्थता के बीच समय निकाल कर अपने छन्द भेजे हैं| मंच इन दोनों का सहृदय आभार प्रकट करता है|




कम्प्यूटर से सीखिये , मुन्ना ज्ञान-विज्ञान |
पढ़ पाओगे आप यूँ , पहले से आसान ||
पहले से आसान, पढ़ाई हो जाएगी|
विद्वानों के साथ, भेंट भी हो पाएगी|
करो सही उपयोग , बनाओ इसे न बदतर|
कहत ' विर्क ' कविराय ,सहायक है कम्प्यूटर|१|
[अध्यापक महोदय अब हमें विश्वास है कि आप अपने शिष्यों को छन्द ज्ञान अवश्य देंगे]


भारत देश महान का , तुम खुद समझो हाल |
कूड़ा करकट बीनते , नौनिहाल बेहाल ||
नौनिहाल बेहाल ,झेलते हैं लाचारी |
मिले नहीं उपचार , गरीबी बनी बिमारी|
'विर्क' समझ ना पाय, विश्व के आगे - क्यूँ? नत!!!
दया-धर्म का दूत , जगद गुरु अपना भारत |२|
[पीड़ा को सही शब्द प्रदान किए हैं आपने]

:- दिलबाग विर्क






सुंदरियाँ इठला रहीं, रन वर्षा के साथ |
चौका-छक्का जब लगे, उछलें दो दो हाथ||
उछलें दो दो हाथ, तभी बालर खिसियाते|
फील्डिंग करके चुस्त,एक दो विकिट उड़ाते|
नहीं व्यर्थ हों बोर, कभी दर्शक मंडलियाँ|
शामिल कीं इस हेतु, मेच में ये सुंदरियाँ|१|
[अंकल आप भी देखते हैं २०-२० मेच!!!!!!!! और !!!!!!!!!!]


भारत ने फिर धार कर, विश्व-विजय का ताज|
आनंदित, फिर, कर दिया, सारा देश समाज||
सारा देश समाज , टीम का मोहक चहरा|
माही औ युवराज, सचिन, भज्जी औ नहरा|
'व्यथित आस' कर पूर्ण, विरोधी को कर गारत|
किया 'विश्व-कप' नाम, ख़ुशी से रोया भारत|२|
[सच में त्रिपाठी जी अमूमन हर हिन्दुस्तानी की आँखें नम हो आयीं थीं उस वक्त]


कम्पुटर कब गजवदन ,कब माउस में शक्ति|
पत्नी को नाराज़ कर, फिर भी पाली भक्ति||
फिर भी पाली भक्ति, घराणी हुई उपेक्षित|
कुंठित मन की रिक्ति, नहीं पा सकी अपेक्षित|
व्यथित प्रिया यदि मित्र, रहें खुशियाँ भी हटकर|
ये ना ठीक सलाह , ज़रा त्यागो कम्प्यूटर |३|
[तजुर्बे की बात कह रहे हैं त्रिपाठी जी]
:- बृजेश त्रिपाठी

इन दोनों सरस्वती पुत्रों को पढने के बाद अब हम प्रतीक्षा करते हैं अन्य साहित्य के उपासकों के छंदों के आने की| तब तक आप सभी इन साहित्य सुमनों की सुगंध से सराबोर हो कर अपनी टिप्पणियाँ इन पर न्यौछावर कीजिएगा |

जय माँ शारदे!!!