ऊबड़-खाबड़ चाँद - से न तुलना करो जी
जानिए कि उसने क्यों - खुद को छिपाया है|
कहाँ सदरीति, कहाँ - रूखा-सूखा निशापति,
तुलना की कल्पना से, व्योम घबड़ाया है|
लाठी - गोली - आँसू-गैस, सारे हथकंडे फेल,
ब्यूटी-कम्पटीशन में, वो हड़बड़ाया है|
जग की अनीति पे तू, भारी सदा सदरीति
देख तेरी सुन्दरता, चाँद भी लजाया है||
[ओहो, इस पंक्ति को ले कर इस तरह की प्रस्तुति!!! है न अनुभव वाली बात!!!!
वाकई सदरीति की भला क्या तुलना रूखे सूखे निशापति से| रस-विषय
परिवर्तन जो थोड़ा सा है भी, विशिष्टता को ले कर आया है|
'ब्यूटी कम्पटीशन' का बहुत ही मनोहारी प्रयोग किया है
आपने, बधाई के पूरे पूरे हकदार हैं आप]
बन्नो सरकारी वेश-भूषा में सुन्दर लगे,
बन्ने का तो भेष ही, रोचक समाचार है|
बन्नो के हैं आभूषण-परिधान भ्रष्टाचार,
बन्ने का तो भगवा दुपट्टा कंठहार है|
बन्नो शरमीली, मुँह - ढाँपे फिरे दशकों से,
बन्ने का तो ऊँचा स्वर एक इश्तहार है|
बन्नो खिसियाई बिल्ली, खम्भा नोचने में लगी,
बन्ने का बदन जैसे क़ुतुब मीनार है||
[ हास्य रस पर केन्द्रित इस पंक्ति पर आपने गज़ब की
व्यंग्यातमक प्रस्तुति दी है| कवि की कल्पना है भाई]
जहाँ चाह, वहाँ राह| कवि ठाने, तो कल्पनाएं खुद-ब-खुद चल कर आती हैं उस के पास| रूपक और उपमाएँ हाजिर रहती हैं उस के दरबार में| विषय - कल्पना - व्याकरण - रस - छन्द -अलंकार वगैरह का संसार बहुत बड़ा है| आलोचक और समीक्षक अभी भी उस पर काम कर रहे हैं, निष्कर्ष प्रतीक्षारत है :)| परिवर्तन संसार का अकाट्य नियम है|
छंदों को सिर्फ एक फॉर्मेट / उपकरण मानते हुए, यदि उन पर समय के अनुसार हम लोग अच्छे, तार्किक और जन-साधारण को रुचिकर प्रयोग करते रहेंगे, तो इन छंदों को अगली पीढ़ियों तक 'सहज-स्वीकृत' रूप में पहुँचा पाएंगे, अन्यथा सत्य हम सब जानते ही हैं|
आदरणीय त्रिपाठी जी के इन अनमोल छंदों का रस पान करने के साथ साथ इन पर अपनी टिप्पणी रूपी पुष्प वर्षा आप को करनी है और हमें तैयारी करनी है एक और हिलाऊ टाइप पोस्ट की|
कुछ और मित्रों ने भी छन्द भेजे हैं, उन की लगन और दृढ़ इच्छा शक्ति को प्रणाम| व्यस्तता वश उत्तर पेंडिंग हैं, पर जल्द ही ये काम भी शुरू किया जायेगा| तब तक उन सभी मित्रों से निवेदन है कि इस आयोजन की घनाक्षरी छन्द संबन्धित अब तक की सभी पोस्ट पढ़ें, घोषणा वाली पोस्ट को बार बार पढ़ें, दी गईं औडियो लिंक्स को बार बार सुनें, इस से हमारा और उन का - दोनों का काम काफी आसान हो जाएगा| उन की आसानी के लिए सारी की सारी लिंक्स एक बार फिर से यहीं इसी पोस्ट में नीचे दी गई हैं|
इस आयोजन को आप लोगों द्वारा प्रदत्त सहयोग के लिए बहुत बहुत आभार| मित्रो, कभी कभी
ठाले-बैठे भी देख लिया करो, भाई कवि हैं हम भी तो, आप की राय की प्रतीक्षा हमें भी रहती है|
जय माँ शारदे!