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राहुल द्रविड़ द ग्रेट क्रिकेटर

राहुल द्रविड़ का नाम ले कर, आइये बातें करें|
हर दम कि जिन के चेहरे से, फूल खुशियों के झरें||
वो टीम के अन्दर रहें, या - फिर, जुदा हों टीम से|
हमने सुने अब तक न उन से, शब्द कड़वे नीम से||

इस मीडिया ने जब कि सब कुछ, जाँच औ परखा लिया|
'दी वाल' को दीवाल जैसा, नाम तब ही तो दिया||
इस ओर हर बोलर द्रविड़ को, देख कर डरता रहा|
तो उस तरफ बल्ला द्रविड़ का, स्कोर बुक भरता  रहा||

यह ज़िंदगी है दोस्त,कब ये, एक जैसी रह सकी|
राहुल द्रविड़ की ज़िंदगी में - भी, समय था अनलकी||
जब वक़्त रूठा हो, न कोई - बात बन पाए कभी|
आलोचना के वश भ्रमित हो, बोलने लगते सभी||

इक दौर था जब द्रविड़ के बिन, टीम चलती थी नहीं|
इक दौर था जब द्रविड़ के बिन, दाल गलती थी नहीं||
इक दौर फिर आया अचानक, द्रविड़ अपना खो गया|
हिन्दोसतां की टीम से ही, नाम गायब हो गया||

पर स्वाभिमानी आदमी कब,  भाव देता वक़्त को|
'कर्मेष्ठ', कर्मों से हिला दे, इंद्र के भी तख़्त को|
दिन रात मेहनत की, न परवा की, ज़रा भी 'निंद' की|
कुछ वक़्त बीता था, कि राहुल, शान था फिर हिंद की||

इस हाल के इंग्लेंड दौरे - के नतीज़े देखिये|    
उस के मुताबिक़ फिर द्रविड़ की, कामयाबी लेखिये||
  'दी वाल' तो दीवाल है भई, क्या कहें उस के लिए|
हम तो कहेंगे बस यही, जब - तक जिए, 'वट' से जिए|| 



[छन्द - हरिगीतिका]

कुण्डलिया छन्द - वास्तविकता स्वीकारें

जब से आइ पि एल ने, यार जगाई आस|
काउन्टी किरकेट का, क्रेज़ रहा ना खास||
क्रेज़ रहा ना खास, वास्तविकता स्वीकारें|
निज गृह, जन, गुण, धर्म, समाज सदा सत्कारें|
निज 'भू' ही सम्मान - दिलाती - कहते तो सब|
किंतु समझते लोग, वक्त - समझाता है जब||



अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आइ सी सी की चौधराहट को आप लोग भूले नहीं होंगे| पर जब से आइ पी एल फॉर्मेट मशहूर हुआ है, इस को ले कर जब-तब आपत्तियाँ दर्ज कराई जाती रही हैं| हम मानते हैं कि आइ पी एल की अपनी खामियाँ हैं, पर क्या आइ सी सी दूध धुली थी? या है?

आज कम से कम भारतीय हुनरमंद प्रतियोगी किसी की इनायत के मोहताज तो नहीं हैं...................

भाई हमने तो अपने मन की बात कह दी है............................. आप क्या कहते हैं?

भारत में किरकेट का, सदा महत्व महान [अमृत ध्वनि छन्द]

भारत में किरकेट का, सदा महत्व महान|
सब चाहें नर-नारियाँ, बूढ़े-बालक-ज्वान||
बूढ़े-बालक-ज्वान, सराहत, मेच निहारत|
शॉट लगावत, गुल्लि उड़ावत, जान निसारत|
आदि नवागत, बात बतावत, रखें महारत|
शर्त लगावत, मौज मनावत, पल छिन भारत||

अमृत ध्वनि छन्द
छन्द विधान
[१] कुल छह पंक्तियों वाला छन्द
[२] पहली दो पंक्तियाँ दोहे की, दोहा विधान के अनुसार, दूसरी पंक्ति में आने वाला दोहा का चौथा चरण, तीसरी पंक्ति के शुरू में आता है
[३] तीसरी से छठी हर पंक्ति २४ मात्रा वाली
[४] तीसरी से छठी हर पंक्ति ८-८ मात्रा के तीन भागों में विभक्त
[५] तीसरी से छठी पंक्ति के ८ मात्रा वाले हर भाग की ८ वीं मात्रा पर लघु वर्ण के साथ यति| हालाँकि इस विषय में हमारे अग्रज आदरणीय आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' जी का मानना है कि ऐसा कोई विधान नहीं कि यति लघु वर्ण के साथ ही हो| आज की समस्या पूर्ति मंच की पोस्ट में उन्होने एक उदाहरण भी दिया है| परंतु ८-८ मात्रा वाले तीन टुकड़े ज़रूर रखे जाने चाहिए| तभी तो अमृत ध्वनि छन्द का आभास होगा, नहीं तो ये भी कुण्डलिया छन्द हो जाएगा [११+१३ मात्रा और ११ वीं मात्रा पर लघु अक्षर की यति के साथ]|
[६] कुंडलिया छन्द की तरह इस छन्द के शुरू और आख़िर में समान शब्द अपेक्षित

अब उदाहरण, ऊपर दिए गये अमृत ध्वनि छन्द के आधार पर:-

भारत में किरकेट का
२११ २ ११२१ २ = १३ मात्रा, अंत में लघु गुरु
सदा महत्व महान
१२ १२१ १२१ = ११ मात्रा, अंत में गुरु लघु,
सब चाहें नर-नारियाँ,
११ २२ ११ २१२ = १३ मात्रा, अंत में लघु गुरु
बूढ़े-बालक-ज्वान
२२ २११ २१ = ११ मात्रा, अंत में गुरु लघु, ज्वान में आधे 'ज' अक्षर के बोलते समय 'वा' में सम्मिलित होने के कारण अतिरिक्त मात्रा नहीं

अमृत ध्वनि वाला हिस्सा सही में यहाँ से शुरू होता है| देखिये, दोहे के चौथे चरण की ११ मात्राओं को कैसे ८ + ३ [ = ११ ] मात्रा के दो भागों में पहले से ही विभक्त कर के रखा गया है|

बूढ़े-बालक-
२२ २११ = ८ मात्रा, अंत में लघु
ज्वान, सराहत,
२१ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु
मेच निहारत
२१ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु

शॉट लगावत,
२१ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु
गुल्लि उड़ावत,
२१ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु
जान निसारत
२१ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु

आदि नवागत, [नयी पुरानी बातें]
२१ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु
बात बतावत,
२१ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु
रखें महारत
१२ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु

शर्त लगावत,
२१ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु
मौज मनावत,
२१ १२११ = ८ मात्रा, अंत में लघु
पल छिन भारत
११ ११ २११ = ८ मात्रा, अंत में लघु

गुरु मुख से प्राप्त ज्ञान आप सभी के साथ साझा किया है| यदि इस ज्ञान में आप लोग अभिवृद्धि कर सकें, तो मेरा सौभाग्य होगा|

आय्पीयल [IPL] के खेल की बड़ी अनोखी रीत

आय्पीयल [IPL] के खेल की बड़ी अनोखी रीत|
सभी कमाते हैं यहाँ, हार मिले या जीत||
हार मिले या जीत, भींत से मत्था मारूँ|
धोनी-सचिन विरुद्ध, जभी युवराज निहारूँ|
हाँ पर ये भी बात, माननी होगी निश्छल|
गुमनामों के हेतु, श्रेष्ठ वर है आय्पीयल||

भद्रजनों की रीत नहीं ये संगाकारा

हार गए जो टॉस, किसलिए उसे नकारा|
भद्रजनों की रीत, नहीं ये संगाकारा|
देखी जब ये तुच्छ, आपकी आँख मिचौनी|
चौंक हुए स्तब्ध, जेफ क्रो, शास्त्री, धोनी|1|

तेंदुलकर, सहवाग, ना चले, फर्क पड़ा ना|
गौतम और विराट, खेल खेले मर्दाना|
धोनी लंगर डाल, क्रीज़ से चिपके डट के|
समय समय पर दर्शनीय, फटकारे फटके|2|

जब सर चढ़े जुनून, ख्वाब पूरे होते हैं|
सब के सम्मुख वीर, बालकों से रोते हैं|
दिल से लें जो ठान, फिर किसी की ना मानें|
हार मिले या जीत, धुरंधर लड़ना जानें|3|

त्र्यासी वाली बात, अब न कोई बोलेगा|
सोचेगा सौ बार, शब्द अपने तोलेगा|
अफ्रीका, इंगलेंड, पाक, औसी या लंका|
सब को दे के मात, बजाया हमने डंका|4|

छन्द - रोला

पाक दिल जीत घर गया

तेंदुलकर, सहवाग, कोहली, गौतम, माही|
रैना सँग युवराज, कामयाबी के राही|
नहरा और मुनाफ़, इक दफ़ा फिर से चमके|
भज्जी संग जहीर, खेल दिखलाया जम के|१|

हारा मेच परन्तु, पाक दिल जीत घर गया|
एक अनोखा काम, इस दफ़ा पाक कर गया|
नफ़रत का हो अंत, प्यार वाली हो बिगिनिंग|
शाहिद ने ये बोल, बिगिन कर दी न्यू ईनिंग|२|

अब अंतिम है मेच, दिल धड़कता है पल छिन|
सब के सब बेताब, हो रहे घड़ियाँ गिन गिन|
कैसा होगा मेच, सोचते हैं ये ही सब|
बोल रहे कुछ लोग, जो नहीं अब, तो फिर कब|३|

तेंदुलकर तुम श्रेष्ठ, मानता है जग सारा|
आशा तुमसे चूँकि, खास अंदाज तुम्हारा|
तुम हो क्यूँ जग-श्रेष्ठ, आज फिर से बतला दो|
मारो सौवाँ शतक, झूमने का मौका दो|४|

भारत में किरकेट, बोलता है सर चढ़ के|
सब ने किया क़ुबूल, प्रशंसा भी की बढ़ के|
अपनी तो ये राय, हार हो या फिर विक्ट्री|
खेलें ऐसा खेल, जो क़ि बन जाए हिस्ट्री|५|

छन्द : रोला
विधान ११+१३=२४ मात्रा

IND SA 1 DAY SERIES - JAN 11

ट्वेन्टी-ट्वेन्टी, टेस्ट में; स्वप्न हुए साकार|
इकदिवसी अब आ रहे, साथ लिए ललकार||
साथ लिए ललकार, करो स्वीकार चुनौती|
जाँबाज़ो इस बार, दरो दे धार दरौंती|
विश्व चषक है द्वार खड़ा देखे तुम सबको|
विजय वरो तुम यार, मनाएँ हम सब रब को||

IPL Sale पर एक छंद

बीती बीते वीक में, आय्पीयल की सेल
खड़े रह गये टापते, लारा, सौरव, गेल
लारा, सौरव, गेल, सनथ भी फेल हो गये
कई तजुर्बेकार, यहाँ बेमेल हो गये
मोदी, पाकिस्तान, तजुर्बे की इ फजीती
दिला गयी फिर याद, अनगिनत बातें बीती

सलाम सचिन तेंदुलकर

अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में शतकों का अर्ध शतक पूरा करने पर सचिन तेंदुलकर के सम्मान में:-

सचिन सचिन सच्चिन सचिन, सचिन सचिन सच्चिन्न|
दुनिया की किरकेट का, तुम हो भाग अभिन्न||
तुम हो भाग अभिन्न, भिन्न है खेल तुम्हारा|
खिन्न हुआ था वार्न, देख कर स्वप्न, बेचारा|
आज तलक है याद, सचिन हमको वो मंज़र|
'बच्चू' जिसने कहा, उसी को मारा सिक्सर||

नव-युवकों का करना ही होगा अभिनंदन

अद्भुत, अत्युत्तम, अमित, अनुपम, अगम, अपार|
कल थी सारी इंडिया, यूसुफ़ पर बलिहार||
यूसुफ़ पर बलिहार, यार सब हक्के बक्के|
घुमा घुमा कर क्या मारे हैं चौके छक्के|
खेल-कला-व्यापार-राजनीति या प्रबंधन|
नव-युवकों का करना ही होगा अभिनंदन||

नव-कुण्डलिया - IND vs NZ 2nd ODI JAIPUR 01.12.10

गोवाहाटी में दिखी, हट कर युवा ब्रिगेड|
कीवी जिसके सामने, करते दिखे परेड||
करते दिखे परेड, ग्रेड दिखलाई जम के|
अश्विन, युवी, विराट, श्रिसन्त धमक कर चमके|
हमने तो यारो ये ही निरधार कर लिया|
भारत जब भी खेला, जीती टीम इंडिया||

धोनी की तकदीर चली, भाई बल्ले बल्ले

वी वी. एस. उड़ा दिए, न्यूजिलेंड के होश|
भज्जी में भी आ गया, उन्हें देख के जोश||
उन्हें देख के जोश, रोशनी ऐसी छाई|
कीवी ने दुम दुपका कर के जान बचाई|
फ़ील्डर-बौलर पस्त, पड़े ना कुछ भी पल्ले|
धोनी की तकदीर चली, भाई बल्ले बल्ले||

इंडिया ओस्ट्रेलिया दूसरा वन ड़े

टेस्ट मॅच सीरीज़ में, दिन जो देखे डार्क|
पोंटिंग को कर के विदा, औसिस लाए क्लार्क||
औसिस लाए क्लार्क, शार्क बन के वो आया|
धोनी ने उसको भी हुलरा कर सुलटाया|
अपनी धरती पे मनमानी करने वालो|
विश्व चषक से पहले अपनी नाक बचा लो||

नव-कुण्डलिया - टेस्ट में इंडिया द्वारा ओस्ट्रेलिया का क्लीन स्वीप

दीवाली के पूर्व ही , चलो जलाएँ दीप|
बोल रहा हर इंडियन, वॉट ए क्लीन स्वीप||
वॉट ए क्लीन स्वीप, डीप मीनिंग है इस का|
उसे पछाड़ा, दुनिया में 'हौआ' है जिस का|
'भारत के वीरो' देखो तुम भूल न जाना|
वन-डे में भी अपने जौहर को दिखलाना||

१४ हजारी सचिन तेंदुलकर

झुठला कर सरे मिथक, औ अनुमान तमाम|
फोर्टीन थौजेंड हो गए, तेंदुलकर के नाम||
तेंदुलकर के नाम, राम जी उन को राखें|
किरकिट प्रेमी उन के करतब के फल चाखें|
सब के प्यारे, और दुलारे सचिन हमारे|
चर्चा फिर से उनकी होगी द्वारे द्वारे||