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ग़ज़ल - सुख की बाँहों में कभी प्यार से घेरे जाएँ - के पी अनमोल

 

 
सुख की बाँहों में कभी प्यार से घेरे जाएँ
और हम दुःख की तरफ आँख तरेरे जाएँ
 
जिस तरफ रहती है हर वक़्त दीवारों पे नमी
बस उसी ओर नयन धूप के फेरे जाएँ

तज़मीनी (मुख़म्मस) ग़ज़ल – सत्यवान सत्य

 


माना कि तुझसा है नहीं तैराक यार देख

इस फील्ड में है तू बड़ा ही होनहार देख

लेकिन ज़माने पर नहीं है एतबार देख

समीक्षा - चाँद अब हरा हो गया है (के पी अनमोल एवं अनामिका कनौजिया 'प्रतीक्षा' का अनूठा कविता संग्रह)

समकालीन हिन्दी काव्य में युगल-स्वर या संवाद-आधारित काव्य-संरचना अत्यंत विरल है। “चाँद अब हरा हो गया है”—अनामिका कनौजिया ‘प्रतीक्षा’ और के.पी. अनमोल का संयुक्त काव्य-संग्रह—इस दृष्टि से हिन्दी में एक विशिष्ट और उल्लेखनीय प्रयोग के रूप में सामने आता है। 

तज़मीनी (मुख़म्मस) ग़ज़ल - के पी अनमोल


फूल अपने हार पर भारी पड़ा

सुर मधुर झंकार पर भारी पड़ा

हाथ ख़ुद पतवार पर भारी पड़ा

"काम ज़िम्मेदार पर भारी पड़ा

यार का ग़म यार पर भारी पड़ा"