ग़ज़ल - सुख की बाँहों में कभी प्यार से घेरे जाएँ - के पी अनमोल

सुख की बाँहों में कभी प्यार
से घेरे जाएँ
और हम दुःख की
तरफ आँख तरेरे जाएँ
जिस तरफ रहती है
हर वक़्त दीवारों पे नमी
बस उसी ओर नयन
धूप के फेरे जाएँ
साँप जंगल की तरफ
जाएँ मज़े करते हुए
और स्कूल सभी
नन्हे सपेरे जाएँ
कुछ किये बिन जो
निबाह होने लगे दुनिया में
हम तेरे नाम के
मनके ही न फेरे जाएँ
अब ज़रूरत है हमें
ऐसे किसी दीपक की
जिसके आने से
जहां भर के अँधेरे जाएँ
चाहता हूँ कि
तेरा नाम लिखा जाए तो
लफ़्ज़ सोने की क़लम
से ही उकेरे जाएँ
चाह ख़ुशियों की
हो अनमोल अगर थोड़ी भी
फूल मुस्कान के
हर ओर बिखेरे जाएँ
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