तुझसे बातें करने तेरे दर पे आया हूँ
साईं मुझको गले लगा ले, मैं न पराया हूँ
ज्ञान की ज्योत जला, मन का अन्धकार हटाया है
श्रद्धा और सबूरी का रसपान कराया है
कुछ भी नहीं इन्साँ की हस्ती, तूने बताया है
कितना गरूर भरा था मन में, तूने मिटाया है
तेरे चरनों में अर्पित करने, वो ही सर लाया हूँ
साईं मुझको गले लगा ले, मैं न पराया हूँ
मन का मैल मिटा कर इसमें, तुझे बिठाऊँ मैं