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उजालों के बिना दीदार मुमकिन हो न पायेगा - नवीन

उजालों के बिना दीदार मुमकिन हो न पायेगा ।
अँधेरे हों तो आईना भी हमको क्या दिखायेगा ।१।

हरिक अच्छे-बुरे पहलू को मिल-जुल कर दिखा देंगे ।
मगर तब, जब कोई कुछ आईनों के बीच आयेगा ।२।

हुनरमंदो तुम अपनी पैरवी ख़ुद क्यों नहीं करते ।
वगरना कौन है जो आईनों को हक़ दिलायेगा ।३।

मुसाफ़िर सैर में मशगूल, नाविक नोट गिनने में ।
नदी जब सूख जायेगी, हमें तब होश आयेगा ।४।

अगर लहरों पे रहना है, तो आँखें भी खुली रक्खो ।
ज़रा भी चूक होगी तो समन्दर लील जायेगा ।५।
:- नवीन सी. चतुर्वेदी

बहरे हजज मुसम्मन सालिम
मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन

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