नवरस ग़ज़ल
नया काम
नवरस ग़ज़ल
ग़ौर से सुनिये तो हर पल गुनगुनाती है हयात1।
हर घड़ी एक रूप धर कर गीत गाती है हयात॥
1ज़िन्दगी
*
शृंगार रस:-
दिल के दरिया में कनखियों की कँकरिया डाल कर।
इश्क़ के सोये हुये अरमाँ जगाती है हयात॥
*
हास्य रस:-
इश्क़ हो जाये रफ़ू-चक्कर झपकते ही पलक।
जब छरहरे जिस्म को गुम्बद बनाती है हयात॥
*
करुण रस:-
उन को भी भर पेट खाना मिल सके बस इसलिये।
बाल-मज़दूरों से मज़दूरी कराती है हयात॥
*
रौद्र रस:-
काम मिल जाये तो अच्छे दाम मिल पाते नहीं।
अक्सर इस पेचीदगी पर तमतमाती है हयात॥
*
वीर रस:-
पहले तो शाइस्तगी2 से माँगती है अपना हक़।
जब नहीं मिलता है हक़ - शमशीर3 उठाती है हयात॥
2 विनम्रता 3 तलवार
*
भयानक रस:-
क्या भयानक रूप दिखलाती है कोठों पर हहा!!
बेटियों की चीख पर ठुमके लगाती है हयात॥
*
वीभत्स रस:-
आदमी को भूनती है वक़्त के तन्दूर में।
हाय कैसा खाना, खाती है खिलाती है हयात॥
*
अद्भुत रस:-
एक बकरी दर्जनों शेरों पे हावी है जनाब।
देख लो सरकार! क्या क्या गुल खुलाती है हयात॥
*
शांत रस:-
बस्तियों की हस्तियों की मस्तियाँ ढो कर 'नवीन'।
आख़िर-आख़िर शान्त हो कर गीत गाती है हयात॥
हाथ में 'आटा' लिए, जो गुनगुनाये ज़िंदगी|
नवरस ग़ज़ल
ग़ौर से सुनिये तो हर पल गुनगुनाती है हयात1।
हर घड़ी एक रूप धर कर गीत गाती है हयात॥
1ज़िन्दगी
*
शृंगार रस:-
दिल के दरिया में कनखियों की कँकरिया डाल कर।
इश्क़ के सोये हुये अरमाँ जगाती है हयात॥
*
हास्य रस:-
इश्क़ हो जाये रफ़ू-चक्कर झपकते ही पलक।
जब छरहरे जिस्म को गुम्बद बनाती है हयात॥
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करुण रस:-
उन को भी भर पेट खाना मिल सके बस इसलिये।
बाल-मज़दूरों से मज़दूरी कराती है हयात॥
*
रौद्र रस:-
काम मिल जाये तो अच्छे दाम मिल पाते नहीं।
अक्सर इस पेचीदगी पर तमतमाती है हयात॥
*
वीर रस:-
पहले तो शाइस्तगी2 से माँगती है अपना हक़।
जब नहीं मिलता है हक़ - शमशीर3 उठाती है हयात॥
2 विनम्रता 3 तलवार
*
भयानक रस:-
क्या भयानक रूप दिखलाती है कोठों पर हहा!!
बेटियों की चीख पर ठुमके लगाती है हयात॥
*
वीभत्स रस:-
आदमी को भूनती है वक़्त के तन्दूर में।
हाय कैसा खाना, खाती है खिलाती है हयात॥
*
अद्भुत रस:-
एक बकरी दर्जनों शेरों पे हावी है जनाब।
देख लो सरकार! क्या क्या गुल खुलाती है हयात॥
*
शांत रस:-
बस्तियों की हस्तियों की मस्तियाँ ढो कर 'नवीन'।
आख़िर-आख़िर शान्त हो कर गीत गाती है हयात॥
हाथ में 'आटा' लिए, जो गुनगुनाये ज़िंदगी|
देख कर यूँ दिलरुबा को मुस्कुराये ज़िंदगी|१|
क्षृंगार रस:-
कनखियों से देखना - पानी में पत्थर फेंकना|
काश फिर से वो ही मंज़र दोहराये ज़िंदगी|२|
हास्य रस:-
इश्क़ हो जाये रफू चक्कर झपकते ही पलक|
जब छरहरे जिस्म को गुम्बद बनाये ज़िंदगी|३|
करुण रस:-
दिन को मजदूरी, पढ़ाई रात में करते हैं जो|
देख कर उन लाड़लों को, बिलबिलाये ज़िंदगी|४|
रौद्र रस:-
भावनाओं के बहाने, दिल से जब खेले कोई|
देख कर ये खेल झूठा, तमतमाये ज़िंदगी |५|
वीर रस:-
जब हमारे हक़ हमें ता उम्र मिल पाते नहीं |
दिल ये कहता है, न क्यूँ खंज़र उठाये ज़िन्दगी |६|
भयानक रस:-
जिस जगह पर, चीख औरत की, खुशी का हो सबब|
बेटियों को उस जगह ले के न जाये ज़िंदगी |७|
वीभत्स रस:-
आदमी को आदमी खाते जहाँ पर भून कर |
उस जगह जाते हुए भी ख़ौफ़ खाये ज़िंदगी |८|
अद्भुत रस:-
एक बकरी दर्जनों शेरों पे हावी है 'नवीन'|
देखिए सरकार! क्या क्या गुल खिलाये ज़िंदगी|९|
शांत रस:-
बस्तियों की हस्तियों की मस्तियों को देख कर|
दिल कहे अब शांत हो कर गीत गाये ज़िंदगी|१०|
फाएलातुन फाएलातुन फाएलातुन फाएलुन
2122 2122 2122 212
बहरे रमल मुसमन महजूफ
फाएलातुन फाएलातुन फाएलातुन फाएलुन
2122 2122 2122 212
बहरे रमल मुसमन महजूफ