हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
तसव्वुर लाज़िमी है जिस तरह तस्वीर से पहले
तख़य्युल लाज़िमी है जिस तरह तामीर से पहले
इरादा लाज़िमी है जिस तरह तदबीर से पहले
न जाना कि आँसू बहाता है कोई
न जाना कि ग़म को छुपाता है कोई
तुम यही बोलोगे – मुश्किल है सफ़र – मालूम है
और दिखाओगे हमें रस्ते का डर – मालूम है