हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
ढिकाने कौ छोरा, फलाने की छोरी,
छत पै रोज मिलें चुपके-चुपके, चोरी-चोरी
पढ़ाई-लिखाई तौ उनके बस बहाने एं ,
उन्नैं तौ दुछत्ती पै जाकैं नैना लड़ाने ऐं