जंबुद्वीप में आज भी , प्रेम
सुधा अनुबंध ।।
संस्कृति में संस्कार हो , शिक्षा
जग में पूर्ण ।
नई कोंपलें जब खिलें , मधुरसता का चूर्ण ।।
जंबुद्वीप में आज भी , प्रेम
सुधा अनुबंध ।।
संस्कृति में संस्कार हो , शिक्षा
जग में पूर्ण ।
नई कोंपलें जब खिलें , मधुरसता का चूर्ण ।।