साहित्यम्
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मैथिली कविता - तीलक तार – अम्बिका झा
"
हे यौ भइया आँहाँ कोना दुबरा गेल छि
?
बहिन हाथक भोजन बिन कुम्हला गेल छि।
हे यौ कि कहलौं
?
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