30 March 2014

वर्ष 1 अङ्क 3 अप्रेल' 2014

अक्तूबर 2010 में शुरू हुआ था ठाले-बैठे ब्लॉग, ब्लॉग्स्पॉट पर। इस से पहले यह लाइव डॉट कॉम पर था और उस से भी पहले यह एक स्थानिक साप्ताहिक का नियमित कॉलम हुआ करता था। बरसों से बहुत सारे मित्रों का कहना रहा है कि यह नाम कुछ साहित्यिक नहीं लगता। सो फायनली अब यह ठाले-बैठे ब्लॉग एक विधिवत वेबसाइट के रूप में “साहित्यम् नाम के साथ आप के समक्ष प्रस्तुत है जिस का कि URL है www.saahityam.org/ । सारा पुराना DATA सहेज लिया गया है। आने वाले दिनों में इसे और अधिक परिमार्जित करने का प्रयास किया जायेगा। एक और बात, आदरणीय मयङ्क अवस्थी साहब ने सङ्केत दिया कि इस वेबपेज़ की USP भी स्पष्टतया परिलक्षित होनी चाहिये। यह वेबपेज़ पहले से ही छन्द और ग़ज़ल की सेवा में जुटा हुआ था, बाद में कहानी, कविता, व्यंग्य जोड़े गये । ब्रज-गजल भी पहले से ही मौजूद थी अब अन्य प्रान्तीय भाषा-बोलियों की गजलों को भी हर अङ्क में सम्मिलित किया जायेगा। आशा है यह प्रयास आप को पसन्द आ रहा है। आप के सुझावों की प्रतीक्षा रहती है। 

कहानी

व्यंग्य

कविता / नज़्म

हाइकु

छन्द
गीत / नवगीत

ग़ज़ल

आञ्चलिक भाषा / बोली की गजलें

अन्य
डाइरेक्टरी बराए शुअरा ओ शाइरात (कवियों और कवियित्रियोंकी डाइरेक्टरी)

बौर-बौर में रस भरा, ठौर-ठौर उत्कर्ष।

इस का मतलब आ गया, नैसर्गिक-नव-वर्ष॥ विक्रम-सम्वतसर 2071 / गुढ़ी-पड़वा की हार्दिक शुभ-कामनाएँ। अगले अङ्क के लिये अपनी रचनाएँ navincchaturvedi@gmail.com पर कृपया 15 अप्रेल से भेजने की कृपा करें। 

22 comments:

  1. बहुत शुभकामनाएं। बधाई।
    कामना करता हूँ कि यह साहित्यिक मंच लोकप्रियता के साथ गुणवत्ता के नए आयाम स्थापित करे।
    सादर
    हरि जोशी

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  2. आदरणीय नवीन जी,
    आपका यह कदम बहुत ही सराहनीय है. आपकी इस मुहिम में मैं आपके साथ हूँ. मेरे योग्य जो भी कार्य हो, अवश्य बताइएगा.
    सादर!
    बृजेश

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  3. बहुत शुभकामनाएं।

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  4. हार्दिक बधाई :
    यह मंच साहित्य और भाषा के क्षेत्र में नए आयाम जोड़ सके यह कामना करती हूँ !
    - प्रतिभा सक्सेना.

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  5. nootan varsh aur gudipadwa kee shubhkamnaayen

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  6. इस सराहनीय प्रयास के लिये आपको हार्दिक शुभकामनायें एवं अभिनन्दन नवीन जी ! इस प्रयास के सन्दर्भ में हिन्दी भाषा के उज्जवल एवं तेजोमय भविष्य को समय के दर्पण में आज भी देख पा रही हूँ ! आपका बहुत-बहुत आभार !

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  7. बहुत शुभकामनाये !

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  8. बहुत शुभकामनायें इस अंक के लिए ... एक भागीरथी प्रयास है जिसको आप साक्षात कर रहे हैं ...

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  9. विक्रम-सम्वतसर 2071 / गुढ़ी-पड़वा की हार्दिक शुभ-कामनाएँ।

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  10. सराहनीय प्रयास ...! हार्दिक शुभ-कामनाएँ।

    RECENT POST - माँ, ( 200 वीं पोस्ट, )

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  11. आ.नवीन भाईसाहब ,
    सादर प्रणाम!
    साहित्यम का अप्रेल १४ अंक प्राप्त हुआ |नये नाम के साथ यह साहित्य जगत में आपके नाम के अनुरूप नवीन प्रयास है |किसी पत्रिका में आंचलिक भाषा की ग़ज़लों \रचनाओं को अलग स्तम्भ पहली बार हासिल हुआ है |यह कदम ग़ज़ल के फलक को और विस्तृत करेगा |आ.राजेंद्र स्वर्णकार सा.के राजस्थानी ग़ज़ल ब्लॉग का आपने कहीं ज़िक्र किया था ,कृपया ब्लॉग पता पुनः स्मरण करवाने की कृपा करें | साहित्यम के इस अंक की सभी रचनाएँ उत्कृष्ट हैं |साहित्य की लगभग सभी विधाओं को समाहित करता हुआ यह वेब पोर्टल समकालीन भारतीय साहित्य में मील का पत्थर सिद्ध होगा तथा आने वाली पीढ़ियों का मार्ग आलोकित करेगा |आपका प्रयास स्तुत्य है |
    आपके उत्तम स्वास्थ्य तथा 'साहित्यम' की सतत प्रगति की मंगल कामना के साथ -
    स्नेहाकांक्षी अनुज
    'खुरशीद' खैराड़ी जोधपुर ०९४१३४०८४२२

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  12. पाठकों/रचनाकारों के लिए बहुत बढ़िया खबर...
    ढेरों शुभकामनाएं....

    सादर
    अनु

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  13. नए कलेवर में सजी सुन्दर गुणवत्तापूर्ण पत्रिका के लिए बधाई...
    ढेरों शुभकामनाएँ !!

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  14. kuch log comment karne ke bajaay mail bhej rahe hain, is liye mujhe un ke naam ke saath post karna paD raha hai. hope they will comment here next time.

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  15. सार्वजनिक सूचना से अवगत हुआ. वस्तुतः आपके मंच के लिए विशेष दिन है.
    साहित्यम् आपकी समस्त उपलब्धियों और प्रतीक्षित सफलता का महत्त्वपूर्ण कारण साबित हो.
    शुभकामनाएँ.

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  16. अति सुन्दर प्रयास नवीन जी ...मेरे अगीतों के प्रस्तुतीकरण हेतु आभार .....

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  17. नवीन जी

    बहुत बहुत बधाई.... हिन्दी-सेवियों में जो दीवानापन चाहिये, आप में मौजूद है... लगे रहिये....

    तेजेन्द्र शर्मा

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  18. नवीन जी ,
    सराहनीय प्रयास । इस पत्रिका में मुझे शामिल करने के लिए आभार । यहाँ स्वयं को देख अचंभित हूँ ।

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  19. Waah kya baat hai ... bahut badhiya bhai ji

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  20. हार्दिक शुभकामनाएं स्वीकार करें.

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  21. hardik hardik badhai aadarneey naveen is naye prayaas ke liye shubhkamnayen !!

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  22. Indscribe انڈسکرائبFri Apr 04, 08:17:00 am 2014

    Glad to see the word 'Ank' written in classical style after a long time.
    Hardly anyone uses 'ङ्' {.ng(a)} now @navincchaturved @aptrivedi

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