29 March 2014

जो दिल से गुजरती है पुरवाई महकती है - हसन फतेहपुरी

जो दिल से गुजरती है पुरवाई महकती है
इस प्यार की ख़ुशबू से अँगनाई महकती है

उस फूल से चेहरे को एक बार ही देखा था
और आज तलक मेरी बीनाई महकती है
बीनाई – दृष्टि

मेंहदी लगे हाथों की दालान में ख़ुशबू है
खेतों की मुँडेरों पर शहनाई महकती है

घर वालों से छुप-छुप कर मिलते थे जहाँ हम-तुम
उस गाँव की सरहद की अमराई महकती है

मज़दूरों का जज़्बा भी था शाहजहाँ जैसा
पत्थर में मुहब्बत की सच्चाई महकती है

कल रात हसन मेरे ख़्वाबों में वो आया था
अब तक मेरे कमरे की तनहाई महकती है 

:- हसन फतेहपुरी


बहरे हज़ज मुसम्मन अख़रब मक़्फूफ़ मक़्फूफ़ मुख़न्नक सालिम
मफ़ऊलु मुफ़ाईलुन मफ़ऊलु मुफ़ाईलुन

221 1222  221 1222

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

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