30 March 2014

जुबान फिसलते ही नेता का कद बढ़ जाता है - यज्ञ शर्मा

एक पुराना कहावत है- चमड़े का जबान है, फिसल जाता है। ये कहावत जरूर कोई नेता ने बनाया होएंगा। नेता का जबान बड़ा चिकना होता है, उसको फिसलने का आदत होता है। खास कर चुनाव का मौसम में। अलग-अलग अंग का फिसलने का अलग-अलग परिणाम होता है। पांव फिसलता है तो आदमी नीचे गिरता है। जबान फिसलता है तो नेता ऊंचा उठ जाता है। पांव फिसलने का बाद आदमी नजर झुका कर कपड़ा झाड़ता है। जबान फिसलने का बाद नेता सिर उठा कर बहस करता है। राजनीति का बहस अकसर बड़ा बेशर्मी से किया जाता है। चूंकि जबान सबसे जास्ती चुनाव का मौसम में फिसलता है, इस कारण अब चुनाव नीति पर टिका रहने का मुद्दा नहीं रह गएला है, नीति का फिसलने का मुद्दा बन गएला है। 
 
जिंदगी में तीन चीज फिसलता है - एक पैर, दूसरा जबान और तीसरा नजर। तीनों का फिसलना अलग-अलग कमजोरी दरसाता है। पैर का फिसलना बताता है कि आदमी लापरवाह है। जबान का फिसलना बताता है आदमी भरोसे वाला नहीं है। और, नजर का फिसलना बताता है आदमी बदचलन है। हिंदुस्तान में राजनीति का चरित्र पर कोई भरोसा नहीं करता। इस कारण, जब नेता का जबान फिसलता है तो किसी को अचरज नहीं होता। कारण, लोग अच्छा तरह से जानता है कि राजनीति में जबान वास्तव में फिसलता नहीं है, फिसलाया जाता है। नेता का जबान सबसे जास्ती किधर फिसलता है? जिधर उसका वोट बैंक होता है। ये राजनीति का सबसे फिसलना जगह होता है। नेता का जबान उधर फिसलता ईच है। लगता है वोट बैंक का दरवाजा पर हमेशा केले का छिलका पड़ा रहता है। अगर नहीं पड़ा होवे, तो नेता ले जाकर डाल देता है। उसके बाद जबान फिसल जाता है। अगर हिंदुस्तान का राजनीति का वास्ते कोई 'लोगो' या प्रतीक चुनना होवे तो वो क्या होएंगा? केला !! केला कायकू? कारण, हिंदुस्तान में डेमोक्रेसी है। डेमोक्रेसी में लोकप्रियता का बड़ा महत्व है। और, केला संसार का सबसे लोकप्रिय फल है। दुनिया में केला सबसे जास्ती खाया जाता है। आपने 'खाया' शब्द पर गौर किया? कुछ लोग मानता है कि खाना हिंदुस्तानी राजनीति का सबसे लोकप्रिय गतिविधि है। आपने 'लोकप्रिय' शब्द पर गौर किया? इसी कारण, हिंदुस्तान का डेमोक्रेसी का वास्ते केला सबसे सही फल है - गूदा मुंह में डालो और छिलका पर जबान फिसलाओ। 

 
चुनाव नारा-काल होता है। चुनाव चिंता-काल होता है। चुनाव असमंजस-काल होता है। चुनाव प्रश्न-काल होता है। चुनाव का टाइम नेता का मन में सबसे बड़ा प्रश्न ये ईच होता है - मैं जीतेंगा या नहीं? और, तब नेता को खयाल आता है कि मेरा सबसे बड़ा सहारा तो मेरा वोट बैंक है। नेता हमेशा ये बात से डरता है कि कहीं वोट बैंक उसका हाथ से फिसल न जावे। नेता का जिंदगी में चुनाव हारने से बड़ा डर कोई और नहीं होता। और, जब नेता डर जाता है तो सबसे पहले अपना जबान को फिसलाता है। जबान को फिसलाने में नेता को कोई परेशानी नहीं होता। परेशानी फकत तब होता है जब कानून उसका जबान फिसलाने पर रोक लगा देता है। नेता को कानून से परेशानी भले ईच होता होवे, लेकिन वो कानून से डरता नहीं है। कारण, कानून नेता को नहीं बनाता, नेता कानून को बनाता है। नेता कानून का बाप होता है। तो, जबान फिसल जाता है। कारण वो चमड़ा का होता है। वो चमड़ा किसका होता है? आप सोच रहा होएंगा - जब जबान नेता का है, तो चमड़ा बी नेता का ईच होएंगा! जी नहीं, जबान नेता का जरूर होता है, पर चमड़ा नेता का नहीं होता। कारण, चमड़ा एक ऐसा चीज है जो किसी को मार कर ईच हासिल किया जा सकता है। अब, किसी को ये बताने का कोई जरूरत नहीं है कि पिछला साठ साल में राजनीति ने ये देश में क्या-क्या मार दिया। वो सबका मरने का सबसे बड़ा कारण है वो चमड़ा का जबान, जिसने डेमोक्रेसी को केला का छिलका पर खड़ा कर दिएला है।

NBT से साभार

6 comments:

  1. बोले तो अपन जिसको बोट दिएला, वो दल मुंह में अहिंसा रख हाथ में छुरी पकड़ के अपने को खाल-ख्याल का बड़ा पाँव परोसती रही, अब ये कौन बताएगा ये खाल है ये ख्याल है, इसको खाने का इसको नई खाने का इसको पहनने का इसको नहीं पहनने का.....जिसको बोट दिएला वोइच बताएगा न..... हरा टीका लगा के

    पन बोले तो एकदम झकास लिखा है बीड़ू..,
    अपन उनचास लिखा तू तो पचास लिखा बीड़ू.....

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  2. केला कायकू? केला बोले तो 'बनाना' डेमोक्रेसी तो अपुन लोगों का हरमेशा रिपब्लिक माफिक रहेला है. बनाना रिपब्लिक. और बनाना बोले तो इसकू बनाना, उसकू बनाना- येईच तो काम नेता लोग का.. अबभी एक झाडन वाला आयेला है इदर देखो .. सिस्टम को झाड़ के साफ़ करता कि पब्लिक को ही झाड-झुड के रख देता... पण यज्ञ साब बराबर बोला.. थान्कू!

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  5. वाह....बेहद अच्छी और शानदार प्रस्तुति...
    नयी पोस्ट@भजन-जय जय जय हे दुर्गे देवी

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  6. यज्ञ शर्मा जी वाह वाह !! और नीतू सिंघल और कमलेश जी के कमेण्ट भी वाह वाह !! क्या खूब ! व्यंग्य विधा के दम को समझा जाय !! सनद हाज़िर है !! और लित्रेचर तो कोलप्स कर सकता है –लेकिन जो व्यंग्य है इसका सोल मरताइच नईं –मयंक

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