20 January 2012

बुलबुलों से तितलियों से जुगनुओं से हो लगाव - नवीन

बुलबुलों से तितलियों से जुगनुओं से हो लगाव
बागवाँ तो वो है जिसको ख़ुश्बुओं से हो लगाव १

जब कोई गुलशन उजड़ता है तो खिल उठते हैं वो
है बहुत मुमकिन कि उनको उल्लुओं से हो लगाव २ 

दे के सब तालीम बेटी से कहा माँ-बाप ने
उस से रहना दूर जिसको घुँघरुओं से हो लगाव ३

हसरतों के आशियाँ को बस उसी की है तलाश
जिसको खुशियों से ज़ियादा आँसुओं से हो लगाव ४

लोग दानिशमंद इशारा भाँप लेते हैं तुरंत
उनसे क्या कहिये जिन्हें पिछलग्गुओं से हो लगाव ५

:- नवीन सी. चतुर्वेदी

बहरे रमल मुसमन महजूफ
फाएलातुन फाएलातुन फाएलातुन फाएलुन
2122 2122 2122 212

9 comments:

  1. बहुत सुन्दर भाव लिए रचना |
    आशा

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  2. क्या बात है , उल्लुओं तो ट्विटर पर भेजा है . आशा है और लोग आयेंगे यहाँ . एक दिन ठाले बैठे आपको पढ़ना है आद्योपरांत !!

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  3. बुलबुलों से तितलियों से जुगनुओं से हो लगाव
    बागवाँ तो वो है जिसको ख़ुश्बुओं से हो लगाव

    बहुत सुंदर रचना!

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  4. Gazal mein naya rang hai . Aapko
    badhaee .

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  5. बुलबुलों से तितलियों से जुगनुओं से हो लगाव,
    बागवाँ तो वो है जिसको खुश्बुओं से हो लगाव ।

    बहुत बढि़या शेर।

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  6. बुलबुलों से तितलियों से जुगनुओं से हो लगाव
    बागवाँ तो वो है जिसको ख़ुश्बुओं से हो लगाव
    बहुत सुन्दर रचना....सादर अभिनन्दन !!

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