ढूँढे आज गोपियाँ सारी।।
कहाँ छुपे हो कान्हा छलिया।
रंग साँवरा ले साँवलिया।।
ढूँढे आज गोपियाँ सारी।।
कहाँ छुपे हो कान्हा छलिया।
रंग साँवरा ले साँवलिया।।
(आधार छंद - अरिल्ल छंद, कुल – संस्कारी, 16 मापनी
का सममात्रिक छंद, चरणान्त - 122/11)
निज को कभी नहीं बहकाना
माया देख नहीं भरमाना