हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
उमर जवान चमक चेहरे पै शान शकल का सूणा हे।
चंद किरण तेरी झांकी नीचै बाबा लारया धूणा हे।
आँखों का भी कुसूर है दिल की ख़ता भी है
मुमकिन है इनके साथ कोई तीसरा भी है
बैठक पौली बूढ़े स्याणे कम होगे
साँखी फ्हाली ज़कड़ी लाणे कम होगे
पहल्यां आली बात रही ना कोए बी
खंडका धोती दामण आणे कम होगे