हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
रहे रेडियो के हम श्रोता, बड़े प्रेम से सुनते थे
फिल्मी गीतों को सुन-सुन कर, स्वर्णिम सपने बुनते थे