हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
बरसाने तक अइवे में ही मेरी सगरी उमर गुजर गई
राधा तोय रिझइवे में ही मेरी सगरी उमर गुजर गई
तेरे बिन अब नहीं सटैगी तो पै रीझ गयो मेरौ मन
इतनी बात बतइवे में ही मेरी सगरी उमर गुजर गई