साहित्यम्
हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
निरूप घनाक्षरी
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निरूप घनाक्षरी छन्द - अनीता सिंह तोमर 'अनी
रास हो मन भावन
,
प्यारी है ऋतु सावन
,
कृष्ण संग नाच रहीं
,
प्यारी राधा रानी।
छवि लगती है न्यारी
,
रास रचते बिहारी
,
मोहित हैं गोपी सारी
,
कान्हा की दीवानी।
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