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निरूप घनाक्षरी छन्द - अनीता सिंह तोमर 'अनी

 

रास हो मन भावन, प्यारी है ऋतु सावन, 
कृष्ण संग नाच रहीं, प्यारी राधा रानी।

छवि लगती है न्यारी, रास रचते बिहारी, 
मोहित हैं गोपी सारी, कान्हा की दीवानी।