આપણે નફરત શીખ્યાં, તો પ્રેમ મૂક્યો છાપરે
આવતી અમને શરમ, એવું કહ્યું એક વાનરે
સાંભળ્યું ક્યારે, નદીને 'ના' કહ્યું કોઈ સાગરે
મા જ બસ આખા જગતમાં ભૂલ બધ્ધી છાવરે
છું કવિ, જાણ્યા પછી, કંઈ પણ કહ્યું ના દાક્તરે
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સરસ ગઝલ
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