पर्वतों के बीच फैली घाटियां
घाटियों में मुस्कुराती वादियां
वादियों में तैरती चंचल हवा
और हवा कहती तमाम कहानियाँ
कितने हैं नजदीक धरती - आसमाँ
एक दूजे पे हों जैसे मेहरबाँ
ये नज़ारा देख के रब दी कसम
ज़िस्म-ओ-जाँ लेने लगें अँगङाइयाँ
देखते बनती है तारों की चमक
करती है मदहोश फूलों की महक
ज़िन्दगी बन के परी नाचे यहाँ
इस सिरे से उस सिरे तक बेधङक
झुंड में झरने करें अठखेलियाँ
झीलों का साम्राज्य फैला है यहाँ
बस यहीं पे रंज़ोगम शिक़वे - गिले
बारहों महीने मनाते छुट्टियाँ
धूप की दादागिरी है बेअसर
शबनमी कालीन फैली हर डगर
कानों में बजती हों जैसे घंटियाँ
बादलों के बीच होता है सफर
मन थका, आराम पाता है यहां
दिल खुशी के गीत, गाता है यहाँ
आप भी महसूस कर के देख लो
ज़िन्दगी का लुत्फ़ आता है यहाँ