हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
हरियाली हँसती आई,
लाल गुलाबी कलियों ने
देखो मस्ती खूब मचाई।
कोई ना वेध सका,
पुतली मछली की,
राजा का धैर्य थका