लघु लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
लघु लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

लघुकथा - माँ - अनिल शूर ‘आज़ाद’

रात्रि साढ़े दस बजे उसकी हरिद्वार की ट्रेन थी। निर्धारित कार्यक्रमानुसार उसने श्मशान-भूमि के विशेष कक्ष में रखी माँ की अस्थियाँ लीं और वहीं से सीधे स्टेशन पहुँचा।